यमन के ताइज़ में सरकारी सेना और हूती मिलिशिया के बीच भीषण झड़पें, सैकड़ों लड़ाकों के मारे जाने की खबर

ताइज़ (यमन): यमन के ताइज़ शहर में सरकारी सेना और हूती मिलिशिया के बीच 21 अक्टूबर 2026 को भीषण सैन्य टकराव शुरू हो गया। यह लड़ाई मुख्य रूप से पुराने एयरपोर्ट इलाके और पश्चिम ताइज़ के जबल हान के आसपास के क्षेत्रों में हुई है।
हूती सूत्रों ने दावा किया है कि उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जबल हान पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, यमन की सरकारी सेना ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सेना का कहना है कि वे अपनी रक्षात्मक स्थितियों पर मजबूती से टिके हुए हैं और उन्होंने हूतियों के कई हिंसक हमलों को नाकाम कर दिया है।
यमन सशस्त्र बलों के प्रवक्ता माजिद अब्दुल्ला अल-निज़ैली ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान 'फज्र अल-यमन' अभियान के तहत 744 टारगेट ऑपरेशन चलाए गए। इन कार्रवाइयों में लगभग 200 हूती लड़ाकों को खत्म किया गया और उनके 90 सैन्य वाहनों को नष्ट या क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
ताइज़ एक्सिस के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अब्दुलअजीज अल-मजीदी ने इस हिंसा को शहर की रक्षा के लिए एक अस्तित्व की लड़ाई करार दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जमीनी लड़ाई और हवाई हमलों के दौरान 98 हूती लड़ाके मारे गए और 148 घायल हुए हैं।
यह टकराव अब पश्चिमी मोर्चे से आगे बढ़कर अल-शाकाब, अल-मसरख, अल-अकरुध और जबल सब्र के कुछ हिस्सों तक फैल गया है। यमन की सेना हूती रसद, हथियारों के ठिकानों और उनके जमावड़े को निशाना बनाने के लिए हवाई सहायता का इस्तेमाल कर रही है।
यमन में सऊदी राजदूत ने इस बात को दोहराया कि ताइज़ शहर को हूतियों के एजेंडे का बंधक नहीं बनने दिया जाएगा।
दूसरी ओर, यूनिसेफ के प्रतिनिधि अखिल अय्यर ने चेतावनी दी है कि शहर प्रभावी रूप से घेराबंदी में है और मानवीय संकट गहरा रहा है। लगातार जारी इस लड़ाई की वजह से करीब 30 लाख निवासियों के लिए जरूरी सेवाएं ठप हो गई हैं, जिससे भोजन, साफ पानी और ईंधन की भारी किल्लत हो गई है।