ताइज़ में हूती गोलाबारी: पांच नागरिक घायल, तीन बच्चे भी शामिल

ताइज़, यमन: यमन के दक्षिण-पश्चिमी शहर ताइज़ में हूती गोलाबारी ने एक बार फिर आम लोगों की जिंदगी को निशाना बनाया है। सरकारी समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक 13 अक्टूबर 2026 को हुए इस हमले में कम से कम पांच नागरिक घायल हो गए, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। इस घटना को इस महीने के उन हिंसक दौरों की अगली कड़ी माना जा रहा है, जिसने पूरे इलाके को बेचैन कर रखा है।
ताइज़ के आसपास सैन्य हालात 10 अक्टूबर से काफी तेजी से बिगड़े हैं। इससे पहले यमन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि 10 अक्टूबर को अलग-अलग हूती गोलाबारी में दो नागरिकों की मौत हो गई थी और 16 अन्य घायल हुए थे। इनमें तीन बच्चे, छह महिलाएं और कई बुज़ुर्ग शामिल थे। हमले शहर के कई इलाकों में हुए, जिनमें अल-नवाज़िल, अल-क़स्र, अल-धबाब, अल-थलातीन स्ट्रीट, समीआ, अल-अक़रूद, अल-ज़नूज, अक्काद, अल-धहर अल-उल्या और अल-हंगर चेकपॉइंट शामिल हैं।
विस्थापन और राहत का संकट
हूती लड़ाकों और यमन की सरकारी सेनाओं के बीच बढ़ती भिड़ंत ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के अनुसार, मकबाना और जबल हबाशी में भीषण लड़ाई के चलते 10 अक्टूबर से शुरू हुए दो दिनों में 900 से ज्यादा परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए। लोगों के सामने सिर पर छत के साथ-साथ रोज़मर्रा की ज़रूरतों का भी संकट खड़ा हो गया है।
शहर में आने-जाने वाले अहम रास्तों के बंद रहने से जरूरी चीज़ों की भारी कमी की आशंका जताई जा रही है। कई लोग इस हालात की तुलना 2015 से 2016 के बीच ताइज़ की घेराबंदी के दौर से कर रहे हैं, जब शहर लंबे समय तक बाहरी दुनिया से लगभग कटा रहा था।
सैन्य मोर्चे पर स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है। हूती बलों की कोशिश रणनीतिक पहाड़ी जबल सब्र पर कब्ज़ा करने की बताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो पूरे शहर की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा सकता है।
इसी बीच 12 अक्टूबर को यमन सरकार ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। इनमें 60वीं स्ट्रीट के पास, जबल अल-मुनइम, तबात अल-खल्वा और सेंट्रल सिक्योरिटी कैंप के आसपास के इलाके शामिल थे। दूसरी ओर हूती समर्थक सबा एजेंसी ने सना के हमदान जिले और ताइज़ के हयफान जिले में अल-ज़ुरबी रोड पर हवाई हमलों की खबर दी है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने आना बाकी है, लेकिन इतना साफ है कि ताइज़ के आम लोग इस टकराव की सबसे भारी कीमत चुका रहे हैं।