यमन के तइज़ शहर में हूती नाकेबंदी से बढ़ा संकट, लाखों लोग दवा और भोजन के लिए तरसे
यमन के तइज़ में हूती बलों की नाकेबंदी से भोजन और दवा की भारी किल्लत हो गई है, जिससे लाखों लोग संकट में हैं।

तइज़ (यमन): यमन के मानवाधिकार मंत्रालय ने तइज़ शहर में आने वाले भीषण मानवीय संकट को लेकर चेतावनी जारी की है। मंत्रालय ने हूती बलों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शहर की नाकेबंदी तेज कर दी है, जिससे जरूरी सामान की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। मंत्रालय के मुताबिक, हूती समूह ने भोजन, दवा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच रोक दी है और यह दावा कर रहे हैं कि रास्ता खुल गया है, जो कि गलत है।
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के प्रवक्ता जेन्स लेर्के ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि शहर के पास समय तेजी से खत्म हो रहा है। तइज़ पिछले 20 दिनों से पूरी तरह अलग-थलग है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, शहर के 8 लाख से ज्यादा निवासी सहायता से वंचित हैं, जिनमें से 6 लाख लोग पूरी तरह मानवीय मदद पर निर्भर हैं।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया कि अक्टूबर के मध्य तक गेहूं के आटे का भंडार लगभग खत्म हो चुका था। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जानकारी दी कि शहर के 42 अस्पताल ईंधन, ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाई की भारी कमी से जूझ रहे हैं। यूनिसेफ ने इस क्षेत्र में 52 हजार से ज्यादा बच्चों की जांच की, जिनमें से 11,500 बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार पाए गए हैं।
यमन नेटवर्क फॉर राइट्स एंड फ्रीडम ने 1 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच हूती बलों द्वारा 1,891 उल्लंघन दर्ज किए हैं। इसमें 212 नागरिकों की मौत शामिल है, जिनमें 38 बच्चे और 27 महिलाएं थीं। रिपोर्ट के मुताबिक 319 लोग घायल हुए, 23 लोगों को फील्ड एग्जीक्यूशन के जरिए मारा गया और 314 लोगों का अपहरण किया गया। हूती समूह ने पांच स्कूलों को हिरासत केंद्रों और ऑपरेशन रूम में बदल दिया है। पिछले 48 घंटों में तइज़ गवर्नरेंट में 42 और उल्लंघन सामने आए हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने 20 अक्टूबर को नाकेबंदी तुरंत खत्म करने की अपील की और अदन जाने वाले एकमात्र सप्लाई रूट के बंद होने पर चिंता जताई। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ऑक्सफैम और हेलो ट्रस्ट जैसी संस्थाओं ने भी बिना किसी रोक-टोक के मदद पहुंचाने की मांग की है। हेलो ट्रस्ट ने बताया कि उसके माइन-क्लियरेंस स्टाफ के 30 सदस्य शहर के अंदर फंसे हुए हैं।
यमन की विदेश और प्रवासी मंत्री अफ़राह अल-ज़ौबा ने 15 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आपातकालीन हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि इस आपदा को रोकना जरूरी है क्योंकि इससे 40 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं।