यमन के तइज़ शहर में हूतियों की घेराबंदी से गहराया संकट, बुनियादी चीजों की भारी कमी

यमन के तइज़ शहर में हूतियों की घेराबंदी के तीसरे हफ्ते में बुनियादी चीजों की कमी और भारी तबाही मची है।

Nura Basta28 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन के तइज़ शहर में हूतियों की घेराबंदी से गहराया संकट, बुनियादी चीजों की भारी कमी

तइज़ (यमन): यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर तइज़ में हूती बलों की घेराबंदी तीसरे हफ्ते में पहुंच गई है, जिससे यहां गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। 9 लाख से ज्यादा आबादी वाले इस शहर में अक्टूबर की शुरुआत से घेराबंदी तेज हुई है, जिसकी वजह से बुनियादी जरूरतों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।

शहर के लोग अब केवल चावल और बीन्स जैसे सीमित राशन के सहारे गुजारा करने को मजबूर हैं। मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि गेहूं और आटे का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है और अगले तीन हफ्तों में यह पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

हालात 4 अक्टूबर 2026 को तब और बिगड़ गए जब हूती विद्रोहियों ने अल तुरबाह शहर पर कब्जा कर लिया, जिससे आपूर्ति के ज्यादातर रास्ते बंद हो गए। इसके बाद 18 अक्टूबर को हूतियों ने विस्फोटक का इस्तेमाल कर हयजत अल-अब्द सड़क को भारी नुकसान पहुंचाया। यह सड़क भोजन, ईंधन और दवाओं की सप्लाई के लिए सबसे अहम रास्ता थी।

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ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि आम नागरिकों के जीवित रहने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को जानबूझकर नष्ट करना युद्ध के कानूनों का उल्लंघन है। शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन, ईंधन और दवाओं की भारी किल्लत है। एक अस्पताल को तो नवजात शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले इनक्यूबेटर्स की संख्या कम करनी पड़ी है।

हिंसा के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से 19 अक्टूबर 2026 के बीच तइज़ गवर्नरेट में कम से कम 32 नागरिक मारे गए और 115 घायल हुए। 27 अक्टूबर को भी हूती बलों ने दो नागरिकों की जान ली और पांच को घायल कर दिया। वहीं हूतियों ने सरकारी बलों पर एक गैस स्टेशन पर हमला करने का आरोप लगाया है, जिसमें दो लोगों की मौत बताई गई है।

इस संकट के कारण हजारों लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं, जिससे प्रांत में पहले से विस्थापित 1.24 लाख लोगों की संख्या और बढ़ गई है। यमन के प्रधानमंत्री शया अल-ज़िंदानी ने 14 अक्टूबर को इस नाकेबंदी को युद्ध अपराध बताया और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ऑक्सफैम जैसे संगठनों ने भी चेतावनी जारी की है। इन संस्थाओं ने कहा है कि मानवीय सहायता के रास्तों को रोकने से लाखों नागरिकों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

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