अरब में घेराबंदी के बीच भीषण संघर्ष, एक दिन में 60 से ज़्यादा मौतें, कई हमलों से मचा कोहराम.

ताइज़, यमन: यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज़ के पश्चिमी मोर्चे पर 13 अक्टूबर 2026 को हालात एक बार फिर तेज़ी से बिगड़ गए। सरकारी सेनाएं सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन से हूती विद्रोहियों के खिलाफ़ लगातार भिड़ रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ इलाकों पर दोबारा कब्ज़े के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी तस्वीर बताती है कि हूती लड़ाके शहर को चारों तरफ़ से घेरने का दबाव लगातार बढ़ा रहे हैं।
शहर के सभी मुख्य रास्ते बंद होने की खबर है, जिससे ज़रूरी सामान की आवाजाही लगभग थम गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ी आपदा की चेतावनी दी है। दवाइयों, ईंधन और चिकित्सा उपकरणों की भारी किल्लत की वजह से अस्पतालों का काम मुश्किल होता जा रहा है।

पिछले 24 घंटों में बढ़ता नुकसान
यमन नेटवर्क फॉर राइट्स एंड फ्रीडम्स के मुताबिक, बीते 24 घंटों में ताइज़ प्रांत में 43 मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज किए गए। इनमें पांच नागरिकों की मौत हुई, जिनमें एक पांच साल की बच्ची भी शामिल है। 17 लोग घायल हुए। इसी दौरान अल-सफ़वा अस्पताल पर हमले की घटना भी सामने आई, जिसमें अस्पताल की इमारत को नुकसान पहुंचा और कम से कम एक व्यक्ति घायल हुआ।
सैन्य सूत्रों का कहना है कि इसी अवधि में 60 से ज़्यादा लोग मारे गए। इनमें 22 सरकार समर्थक लड़ाके और कम से कम 40 हूती विद्रोही बताए गए हैं। जनप्रतिरोध के लड़ाकों के साथ मिलकर सरकारी बल हमलों को रोकने और जवाबी कार्रवाई में जुटे हैं।
इस पूरी लड़ाई की पृष्ठभूमि में 4 अक्टूबर 2026 का वह ऐलान भी है, जब प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष रशद अल-अलीमी ने हूती नियंत्रित इलाकों को आज़ाद कराने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की थी। उसी हफ़्ते हूतियों ने शहर के बाहर एक अहम कस्बे पर कब्ज़ा कर लिया, जिससे ताइज़ लगभग पूरी तरह घिर गया।
ज़मीनी लड़ाई को सहारा देने के लिए गठबंधन ने हूती सप्लाई लाइनों और मोर्चे तक जाने वाली मदद को रोकने के मकसद से हवाई हमले भी किए हैं। सरकारी सेना के मुताबिक 12 अक्टूबर को जबल अल-मुनइम और ताबत अल-खल्वा की ठिकानों पर हमले किए गए। फिलहाल तस्वीर साफ़ नहीं है, पर इतना तय है कि घेराबंदी कसती जा रही है और आम नागरिकों की मुश्किलें हर दिन बढ़ रही हैं।