यमन के तइज़ में हूती बलों की नाकेबंदी से दवा और ईंधन खत्म, हजारों मरीजों की जान खतरे में
यमन के तइज़ शहर में हूती बलों की नाकेबंदी से मेडिकल सप्लाई और ईंधन खत्म हो रहा है, जिससे हजारों मरीजों की जान खतरे में है।

तइज़ (यमन): यमन के तइज़ शहर में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। यहाँ ईंधन और जरूरी मेडिकल सप्लाई की भारी कमी हो गई है, जिससे लगभग 1,110 किडनी फेल्योर के मरीज और इनक्यूबेटर में रखे 154 शिशुओं की जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
यमनी अधिकार समूह रसद के मुताबिक, हूती बलों ने पिछले तीन हफ्तों से शहर की नाकेबंदी कर रखी है। इस वजह से शहर का संपर्क टूट गया है और जरूरी सहायता सामग्री वहां नहीं पहुंच पा रही है।
रिपब्लिकन अस्पताल के डायलिसिस सेंटर के प्रमुख इसाम मह्यूब डाहन ने बताया कि सेंटर में डायलिसिस के लिए इस्तेमाल होने वाले खास सॉल्यूशन लगभग खत्म हो चुके हैं। इस वजह से सेंटर किसी भी दिन बंद हो सकता है। यहाँ आने वाले 270 नियमित मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों को सत्र की अवधि चार घंटे से घटाकर ढाई घंटे करनी पड़ी है, जो मरीजों के जीवित रहने के लिए पर्याप्त नहीं है।
तइज़ के 42 स्वास्थ्य केंद्रों ने ऑक्सीजन, दवाओं और ईंधन की भारी कमी की रिपोर्ट दी है। अस्पतालों को नवजात शिशुओं और गहन देखभाल सेवाओं (ICU) को चालू रखने के लिए हर महीने 1.56 लाख लीटर से ज्यादा ईंधन की जरूरत होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि इन कमियों की वजह से जीवन रक्षक स्वास्थ्य सेवाओं का चलना मुश्किल हो गया है और यह स्थिति एक बड़ी तबाही की ओर ले जा रही है।
ईंधन की कमी का असर सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है। इससे पानी और स्वच्छता प्रणालियाँ भी ठप हो गई हैं, जिससे करीब 8 लाख लोगों में हैजा और दस्त जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के प्रवक्ता जेन्स लार्क ने कहा कि शहर मानवीय आपूर्ति मार्गों से कटा हुआ है और यहाँ के लोगों के पास समय तेजी से खत्म हो रहा है।
यूरोपीय आयोग ने 25 अक्टूबर 2026 तक यमन में राहत पहुँचाने के लिए 22.5 मिलियन यूरो (25.2 मिलियन डॉलर) की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई संगठनों ने मांग की है कि हूती बल तुरंत मुख्य सड़कों को खोलें ताकि सहायता सामग्री सुरक्षित रूप से शहर तक पहुँच सके।