Saudi Arabia: सऊदी जल सीमा में समुद्री लुटेरों के शिकार बने दो तमिल मछुआरों के शव 38 दिन बाद भारत पहुंचे.

Aanya18 September 20263 min read38 viewsSaudi
Saudi Arabia: सऊदी जल सीमा में समुद्री लुटेरों के शिकार बने दो तमिल मछुआरों के शव 38 दिन बाद भारत पहुंचे.

सऊदी अरब के समंदर में समुद्री लुटेरों की गोलीबारी का शिकार बने दो तमिल मछुआरों के शव घटना के 38 दिन बाद आखिरकार उनकेतन वतन वापस लौट आए हैं। इन दोनों मछुआरों के पार्थिव शरीर 17 सितंबर 2026 को तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जिसके बाद उन्हें उनके पैतृक गांवों में ले जाया गया। इस दर्दनाक घटना ने खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों और विशेषकर मछुआरों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे प्रवासी परिवारों में काफी चिंता का माहौल बना हुआ है।

घटना की पूरी रात और समुद्री लुटेरों का हमला

यह पूरी घटना 10 अगस्त 2026 की रात को सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत के जुबैल तट से दूर समुद्र में घटी थी। मारे गए मछुआरों की पहचान पी. मवीरन और जी. शंकर के रूप में हुई है, जो तमिलनाडु के रहने वाले थे। ये दोनों मछुआरे अपने दो अन्य साथियों पालराज (जिन्हें बलराज भी कहा जाता है) और मणिकंदम के साथ जुबैल से एक मशीनीकृत नाव पर सवार होकर मछली पकड़ने निकले थे। उसी दौरान ईरानी बताए जा रहे समुद्री लुटेरों के एक गिरोह ने उनकी नाव को घेर लिया और लूटपाट करने की कोशिश की। जब इन भारतीय मछुआरों ने लुटेरों का विरोध किया, तो हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें पी. मवीरन की मौके पर ही मौत हो गई।

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अस्पताल में इलाज के दौरान दूसरे मछुआरे की भी हुई मौत

इस भीषण हमले में जी. शंकर के पेट में गंभीर गोलियां लगी थीं, जिन्हें बाद में सऊदी नौसेना के जवानों ने किसी तरह बचाया और जुबैल तथा दम्माम के पास एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां आईसीयू में 10 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 20 अगस्त 2026 को उनका भी निधन हो गया। हालांकि, इस जानलेवा हमले में नाव पर मौजूद अन्य दो साथी पालराज और मणिकंदम किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे और सुरक्षित बच गए।

परिवारों की गुहार और सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप

घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतकों के परिवारों ने मयिलादुथुराई जिला प्रशासन के पास गुहार लगाई, जिसके बाद राज्य सरकार और केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में तुरंत दखल दिया। तमिलनाडु सरकार की ओर से अगस्त महीने के अंत में ही मुख्यमंत्री राहत कोष से दोनों पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी। राज्य विधानसभा में तीखी राजनीतिक बहसों के दौरान मंत्री आधाव अर्जुन ने स्पष्ट किया था कि शवों को भारत लाने में देरी केवल सऊदी नियमों के तहत पूरी होने वाली अनिवार्य कानूनी जांच और प्रक्रियाओं की वजह से हुई थी।

श्रीलंकाई विमान से पहुंचे शव और अंतिम संस्कार

कोलंबो से श्रीलंकाई विमान के जरिए लाए गए दोनों मछुआरों के शवों को 17 सितंबर को मत्स्य पालन और मछुआरा कल्याण मंत्री ए. श्रीनाथ ने हवाई अड्डे पर प्राप्त किया। इसके बाद पुनर्वास और अनिवासी तमिल कल्याण आयुक्तालय की देखरेख में उनके शवों को उनके respective गांवों थोडुवाई और कीझामोवकरई पहुंचाया गया, जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना से आहत होकर स्थानीय मछुआरों ने एकजुटता दिखाते हुए एक दिन का काम पूरी तरह बंद रखा और हड़ताल की।

खाड़ी देशों में भारतीय कामगारों के सामने आ रही चुनौतियां

मंत्री ए. श्रीनाथ ने यह भी पुष्टि की कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस पूरे मामले को लेकर केंद्रीय विदेश मंत्री के साथ लगातार बातचीत की थी। यह दुखद घटना इस बात को दर्शाती है कि खाड़ी देशों में आजीविका चलाने गए भारतीयों को किस तरह के बड़े जोखिमों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह की अन्य घटनाओं में सऊदी अरब में एक पुराने कंपनी जुर्माने के कारण फंसे उत्तराखंड के ट्रक ड्राइवर इंद्रमणि नौटियाल और 13 सितंबर 2026 को ओमान के तट के पास एमटी एल गैया टैंकर पर हुए हमले के बाद से लापता बिहार के नाविक सुमित कुमार सिंह का मामला भी सरकार और प्रशासन के स्तर पर लगातार निगरानी में बना हुआ है।

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