Saudi Arabia News: सऊदी अरब में मारे गए दो भारतीय मछुआरों के शव पहुंचे तमिलनाडु, एक महीने बाद हुआ घर वापसी का सफर पूरा

सऊदी अरब के समुद्र में हुई गोलीबारी की घटना में जान गंवाने वाले तमिलनाडु के दो भारतीय मछुआरों के शव आखिरकार करीब एक महीने की लंबी कानूनी और कागजी कार्रवाई के बाद गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को अपने वतन लौट आए। इन दोनों मछुआरों की मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और वे लगातार सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। विदेश में रोजी-रोटी कमाने गए इन गरीब प्रवासियों की इस तरह अचानक मौत होने से खाड़ी देशों में काम करने वाले अन्य भारतीय कामगारों और उनके परिवारों के बीच भी गहरी चिंता का माहौल बन गया है।
कैसे हुई थी पूरी घटना
मिली जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के चार मछुआरे बीती 10 अगस्त की रात को समुद्र में मछली पकड़ने का काम कर रहे थे, तभी अज्ञात लोगों ने उनकी नाव पर अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। तमिलनाडु सरकार ने बाद में विधानसभा में इस बात की पुष्टि की थी कि यह समुद्र में लूटपाट करने की एक सोची-समझी कोशिश थी, जिसका विरोध करने पर हमलावरों ने यह खूनी खेल खेला। इस गोलीबारी में मयिलादुथुराई जिले के सिरकाज़ी क्षेत्र के थोडुवई गांव के रहने वाले पी. मवेइरन की मौके पर ही गोली लगने से मौत हो गई थी। वहीं, कीझमुवराकाराई गांव के रहने वाले जी. शंकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए सऊदी अरब के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन कई दिनों तक चली जद्दोजहद के बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस नाव पर मौजूद दो अन्य भारतीय मछुआरे इस भयानक हमले में बाल-बाल बच गए और वे घायल अवस्था में किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई वतन वापसी
घटना के तुरंत बाद से ही शवों को भारत लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे थे। चूंकि यह घटना समुद्र के बीच अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई थी, इसलिए सऊदी अरब के स्थानीय कानूनों, पुलिस जांच और तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने में लंबा समय लग गया। मयिलादुथुराई जिला प्रशासन, तमिलनाडु मत्स्य विभाग, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने मिलकर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की और आपसी तालमेल बिठाकर शवों को भारत भेजने का रास्ता साफ किया। चेन्नई एयरपोर्ट पर विमान से शवों के उतरने के बाद उन्हें विशेष एम्बुलेंस के जरिए उनके पैतृक गांवों तक पहुंचाया गया, जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परिवारों की मांग और प्रवासियों की चुनौतियां
ये दोनों ही मछुआरे अपने परिवार का पेट पालने के लिए सऊदी अरब गए थे ताकि घर की आर्थिक स्थिति को सुधार सकें। मवेइरन काफी समय से वहां काम कर रहे थे और अभी हाल ही में छुट्टी बिताकर वापस लौटे थे, जबकि शंकर भी अपने पीछे पत्नी और बच्चों को छोड़ गए हैं। अब इन दोनों पीड़ित परिवारों ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जाए, हमलावरों की सही पहचान करके उन्हें पकड़ा जाए और परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के लिए ऐसी घटनाएं कई तरह की कानूनी और प्रशासनिक उलझनें पैदा करती हैं, जहां अनहोनी होने पर शवों को वापस लाने और कागजी कार्रवाई पूरी करने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।