बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई रोहिंग्याओं की वापसी की मांग

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 24 सितंबर को आयोजित एक विशेष सम्मेलन के दौरान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने दुनिया का ध्यान रोहिंग्या संकट की ओर खींचा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर 'रोहिंग्या संकट: लंबे समय तक विस्थापन से न्याय और जवाबदेही के साथ टिकाऊ समाधान के लिए एक नई अपील' विषयक सम्मेलन में अपने विचार रखे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पांच सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया।
रोहिंग्याओं की सुरक्षित वापसी के लिए पांच सूत्रीय प्रस्ताव
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि केवल सहानुभूति दिखाने के बजाय समस्याओं के वास्तविक कारणों की तलाश की जाए और भरोसेमंद कदम उठाए जाएं। उन्होंने दुनिया भर के देशों से अपील की कि वे रोहिंग्याओं की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए आवश्यक हालात तैयार करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बांग्लादेश सरकार नहीं चाहती कि रोहिंग्या हमेशा के लिए बेघर रहें, बल्कि वे म्यांमार में अपने घरों को सुरक्षित, अपनी मर्जी और पूरे सम्मान के साथ लौट सकें।
उन्होंने बताया कि बांग्लादेश पिछले नौ साल से ज्यादा समय से लगभग 1.2 मिलियन से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों को अपने यहां शरण दिए हुए है। देश की ओर से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और लगभग 6,000 लर्निंग सेंटर के माध्यम से म्यांमार के पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है लेकिन अब इंसानी उदारता को राजनीतिक निष्क्रियता का बहाना नहीं बनाया जा सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर चेतावनी
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि इस संकट को जल्द नहीं सुलझाया गया तो लंबे समय तक विस्थापन जारी रहने से पूरे क्षेत्र में नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इनमें मानव तस्करी, प्रवासियों की तस्करी, ड्रग्स की तस्करी और अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराध शामिल हैं। यदि एक देश में कोई संकट अनसुलझा रहता है, तो वह धीरे-धीरे पूरे इलाके के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। इस सम्मेलन का आयोजन बांग्लादेश और गाम्बिया द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था, जिसमें विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्याओं और आम नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा को तुरंत बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रखाइन राज्य के हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं जहां म्यांमार मिलिट्री और अराकान आर्मी दोनों के द्वारा मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। वापसी के लिए जरूरी है कि म्यांमार में शरणार्थियों के बुनियादी अधिकारों और उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सामने न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने में गाम्बिया की भूमिका की भी सराहना की।