Geneva में एक्टिविस्ट Tasleema Akhter ने PoJK के हालातों पर उठाए सवाल, कही बड़ी बात.

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान एक सोशियो-पॉलिटिकल एक्टिविस्ट Tasleema Akhter ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर यानी PoJK के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, जहां लोगों की हत्याएं की जा रही हैं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में लिया जा रहा है और आम जनता के संचार माध्यमों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि स्थानीय लोग अपनी बुनियादी और मौलिक जरूरतों के लिए जब भी अपनी आवाज उठाते हैं, तो उन्हें भारी हिंसा का सामना करना पड़ता है।
PoJK में इंटरनेट बंद और दमनकारी नीतियां
एक्टिविस्ट ने जिनेवा में मंच से बात करते हुए बताया कि अधिकारियों ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है ताकि वहां की जमीनी सच्चाई बाहर न आ सके। उन्होंने उन सभी पत्रकारों और सोशल एक्टिविस्टों को तुरंत रिहा करने की जोरदार मांग की, जिन्हें सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वे वहां के हालातों को दुनिया के सामने लाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि PoJK की सरकार जिस तरह से आम लोगों पर जुल्म ढा रही है और उनकी हत्याएं करवा रही है, वह बेहद दिल दहला देने वाली और दर्दनाक घटना है। ऐसे हालात ने वहां के आम नागरिकों को अपने परिवार और करीबियों के हक के लिए सड़कों पर उतरने और खुलकर बोलने के लिए मजबूर कर दिया है।
भारत के जम्मू-कश्मीर से की तुलना
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए तसलीमा अख्तर ने PoJK की तुलना भारत के जम्मू और कश्मीर से की और वहां हो रहे विकास कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जम्मू और कश्मीर में युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर बहुत ही बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। वहां के बच्चे विभिन्न सकारात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और अपने खुद के बिजनेस की शुरुआत कर रहे हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही लोन योजनाओं और सब्सिडी का सीधा फायदा युवाओं को मिल रहा है, जिससे वे अपने कारोबार को न सिर्फ शुरू कर रहे बल्कि उसका विस्तार भी कर रहे हैं।
PoJK में शांति और विकास की कमी
उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि भारत के इस हिस्से में शांति, विकास और पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और बेरोजगारी का स्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इसके विपरीत, PoJK के हालात पूरी तरह से इसके उलट हैं, जहां लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरी चीजें हासिल करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है और हिंसा का सामना करना पड़ता है। जब आम जनता और सिविल सोसायटी के लोग अपनी बुनियादी मांगें सरकार के सामने रखते हैं, तो उन्हें बर्बरता का शिकार बनाया जाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों तथा वहां के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे जुल्मों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराएं।