क्षेत्रीय स्थिरता के लिए तेहरान में ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों की बड़ी बैठक

ईरान ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों के साथ तेहरान में सुरक्षा वार्ता की ताकि क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके।

Gautam Sahu28 October 20262 min read0 viewsWorld
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए तेहरान में ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों की बड़ी बैठक

तेहरान: ईरान की राजधानी तेहरान में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक आयोजित की गई। इस वार्ता में ईरान के साथ सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक मूल्यवान अवसर बताया है।

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए। यह अगस्त 2026 में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद संबंधित पक्षों की तेहरान की पहली संयुक्त यात्रा थी।

बुधवार को विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि टिकाऊ सुरक्षा तभी संभव है जब इसमें क्षेत्रीय देशों की भागीदारी हो और बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप न हो। उन्होंने जोर दिया कि दीर्घकालिक सहयोग के लिए राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान और व्यावहारिक प्रतिबद्धताएं जरूरी हैं। अराघची ने ईरान की स्वतंत्रता की रक्षा और युद्ध के विस्तार को रोकने के लिए 'ज़ायोनी शासन' की आक्रामकता का सामना करना आवश्यक बताया।

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी साझा खतरों से निपटने के लिए इस्लामी देशों के बीच एकता का आह्वान किया। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ई ने बताया कि बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और इसमें गाजा, दक्षिणी लेबनान, दक्षिणी सीरिया और वेस्ट बैंक में इजरायल की कार्रवाइयों पर चर्चा हुई।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ई ने इस मुलाकात को आंतरिक सुरक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक कदम कहा। दूसरी ओर, सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना था। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मंगलवार, 27 अक्टूबर को ताइफ की ओर दागी गई हूती मिसाइल को रोका गया था।

पाकिस्तान के प्रस्ताव पर आयोजित इस वार्ता के बाद सभी पक्षों ने निरंतर संवाद और परामर्श जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। इसी दौरान विदेश मंत्री अराघची ने स्थिरता पर चर्चा के लिए मिस्र के विदेश मंत्री से फोन पर बात भी की। हालांकि बैठक के बाद कोई ठोस घोषणा नहीं की गई, लेकिन विश्लेषकों ने इसे संकट को नियंत्रण से बाहर होने से रोकने की एक कोशिश माना है।

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