ईरान की आतंकी गतिविधियों के खिलाफ 10 देशों ने मिलाया हाथ, जारी किया साझा घोषणापत्र

पश्चिमी गोलार्ध में ईरान और उसके समर्थित समूहों द्वारा फैलाई जा रही अस्थिरता के खिलाफ दुनिया के 10 देशों ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका और कनाडा के साथ लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के आठ देशों ने एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें ईरान की आतंकवादी गतिविधियों और उसके खतरनाक ऑपरेशनों की कड़ी निंदा की गई है। ईरान की आतंकवादी गतिविधियां अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि इनका असर पश्चिमी देशों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
इस साझा बयान में स्पष्ट किया गया है कि ईरान और उसके प्रॉक्सी समूह घातक साजिशें रचने, अवैध रूप से फंड जुटाने और राजनीतिक हस्तक्षेप करने जैसे कामों में लिप्त हैं। इन देशों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं के साथ भी खिलवाड़ कर रही हैं। हस्ताक्षर करने वाले देशों ने अब अपनी सुरक्षा प्रणालियों में तालमेल बढ़ाने और आपसी सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया है, ताकि इन खतरों को समय रहते रोका जा सके।
क्षेत्रीय तनाव और सैन्य चेतावनी
यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। एक तरफ जहां ये 10 देश ईरान पर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी आक्रामक मुद्रा दिखाई है। खतम अल-अनबिया मुख्यालय के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो ईरानी सशस्त्र बल अमेरिकी हितों को निशाना बनाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे हाल ही में अमेरिका और परागुआय द्वारा आयोजित 'काउंटरिंग ट्रांसनेशनल टेररिज्म फोरम' की बड़ी भूमिका रही है, जिसमें कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। इसके अलावा, कैंप डेविड में ट्रंप प्रशासन की एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें यमन की स्थिति और ईरान के साथ चल रहे भू-राजनीतिक तनाव पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसी बीच, अमेरिकी दक्षिणी कमान ने कैरिबियन सागर में चार कथित नार्को-आतंकवादियों के खिलाफ एक घातक हमला भी किया है, जो क्षेत्र में सुरक्षा प्रयासों की तीव्रता को दर्शाता है।