मध्य पूर्व की सुरक्षा अब खुद संभालें अरब देश, अमेरिकी दूत थॉमस बैराक ने बताया नया प्लान
अमेरिकी दूत थॉमस बैराक ने कहा कि अमेरिका अब मध्य पूर्व की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी नहीं लेगा, बल्कि देश खुद जिम्मेदार बनें।

दोहा (कतर): तुर्किये में अमेरिकी राजदूत और सीरिया व इराक के लिए विशेष राष्ट्रपति दूत थॉमस बैराक ने कहा है कि मध्य पूर्व के देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में बड़ा बदलाव आ रहा है। कतर के दोहा में 20 अक्टूबर 2026 को आयोजित आठवें ग्लोबल सिक्योरिटी फोरम के दौरान एक इंटरव्यू में बैराक ने साफ किया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र के सुरक्षा गारंटर की अपनी पुरानी भूमिका से पीछे हट रहा है।
बैराक ने इस बदलाव को 'कंट्रोल' करने के बजाय क्षेत्र की 'देखभाल' करने के रूप में described किया। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों की तेल आपूर्ति से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था अब बदल रही है और अमेरिका चाहता है कि क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा की ज्यादा जिम्मेदारी खुद उठाएं। इस कूटनीतिक बदलाव की तुलना उन्होंने 'एक किशोर को पालने' से की और बताया कि सीधे अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से अब तक मनचाहे नतीजे नहीं मिले हैं।
हाल ही में बैराक के बयानों को लेकर काफी विवाद भी हुआ है। 21 अक्टूबर 2026 को उन्होंने ईरानी सरकार को 'बुरा शासन' नहीं बताया और धार्मिक नेतृत्व को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की हरकतों से अलग रखा, जो कि प्रशासन के सामान्य संदेशों से अलग था। इसके बाद 23 अक्टूबर को उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले कुछ दिनों में ईरान पर नए अमेरिकी हमले 'बिल्कुल' संभव हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दावे से दूरी बना ली और कहा कि उन्हें ऐसी किसी योजना की जानकारी नहीं है।
बैराक के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ शांति चाहते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा तालमेल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अक्टूबर 2026 के दौरान बैराक को हितों के टकराव के आरोपों का भी सामना करना पड़ा है। उन पर इराक और सीरिया को जोड़ने वाली 15 अरब डॉलर की प्रस्तावित तेल पाइपलाइन परियोजना से जुड़ी एक फर्म के साथ वित्तीय संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन विवादों के बीच बैराक ने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के अनपेक्षित परिणाम निकले हैं और समाधान के लिए सभी पक्षों को बड़ा समझौता करना होगा।