मध्य गाज़ा में इसराइली ड्रोन हमले से तीन फिलिस्तीनी घायल, शिविरों को बनाया गया निशाना

मध्य गाज़ा के अल-बुरेइच शरणार्थी शिविर में इसराइली ड्रोन की गोलीबारी में तीन फिलिस्तीनी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हमले में एक नौजवान और दो महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इस घटना की सबसे पहले जानकारी Wafa समाचार एजेंसी की तरफ से सामने आई थी, जिसमें बताया गया कि घायलों में एक महिला को गर्दन पर बहुत गंभीर चोट आई है। यह पूरा हमला उस जगह पर हुआ जहां विस्थापित नागरिक अपने तंबू लगाकर रह रहे थे और अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे।
गाज़ा के कई इलाकों में सैन्य कार्रवाई और पिछले मामले
यह खतरनाक हमला 18 सितंबर 2026 को हुआ, जब गाज़ा के अलग-अलग हिस्सों में इसराइली सेना की तरफ से भारी सैन्य अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान खान यूनिस, रफह और गाज़ा सिटी में इसराइली टैंक, हेलीकॉप्टर, तोपखाने और गनबोट लगातार कार्रवाई कर रहे थे। इससे पहले इसराइली रक्षा बलों यानी IDF ने अपने बयानों में दो हमास कमांडरों के मारे जाने की बात कही थी। इनमें से एक नुख्बा कमांडर मुहम्मद जमाल अहमद ईद था जिसे 16 सितंबर को अल-बुरेइच में मारा गया था, और दूसरा नौसेना प्लाटून कमांडर सालेह ज़ियाद इब्राहिम मिक़दाद था जिसे 15 सितंबर को गाज़ा सिटी में ढेर किया गया था।
इन घटनाओं के अलावा कुछ और लोगों की जान जाने के मामले भी सामने आए हैं, जिनमें 27 वर्ष की गर्भवती महिला इमान शालूफ का नाम भी शामिल है। उनकी मौत 14 सितंबर को खान यूनिस के दक्षिण में एक तंबू के अंदर गोली लगने से हुई थी। हालांकि IDF का कहना है कि उनके पास इस महिला की मौत को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी मौजूद नहीं है। इसके अलावा अधिकारी एक अन्य 'डबल-टैप' ड्रोन हमले की भी जांच कर रहे हैं जिसमें 15 वर्ष के बच्चे मोहम्मद अब्दुल जिनाती और एक पैरामेडिक शरीफ शादी लाबाद की मौत हो गई थी। IDF का दावा है कि शरीफ शादी लाबाद जब पहले धमाके के बाद मदद के लिए पहुंचे थे, तब वह एक हमास नुख्बा ऑपरेटिव के रूप में वहां सक्रिय थे। इसके साथ ही नुसेरात शरणार्थी शिविर में करम मुसाद अल-मसारा'आ की मौत की खबर भी सामने आई है।
युद्धविराम समझौते का उल्लंघन
Palestine Chronicle की रिपोर्ट के मुताबिक, गाज़ा में चल रही ये तमाम सैन्य गतिविधियां उस युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन हैं जो 10 अक्टूबर 2025 से लागू किया गया था। इस समझौते के बाद आम जनता को राहत की उम्मीद थी, लेकिन लगातार हो रही इन हिंसक घटनाओं और हमलों की वजह से हालात बदतर होते जा रहे हैं। स्थानीय लोग और विस्थापित परिवार लगातार इन हमलों की चपेट में आ रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।