त्रिपोली में UN कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों का हमला, प्रवासियों के मुद्दे पर मचा बवाल और जांच शुरू.

Aanya10 September 20262 min read18 viewsWorld
त्रिपोली में UN कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों का हमला, प्रवासियों के मुद्दे पर मचा बवाल और जांच शुरू.

लिबिया की राजधानी त्रिपोली में संयुक्त राष्ट्र के एक बड़े कार्यालय पर गुस्साए लोगों ने जोरदार हमला कर दिया और उसे पूरी तरह से सील कर दिया। यह घटना 7 सितंबर 2026 के आसपास शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों ने जबरन संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी IOM के मुख्यालय में प्रवेश किया और वहां रखी कुर्सियों व अन्य सामानों में तोड़फोड़ की। 8 सितंबर तक सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इन लोगों ने वहां मौजूद सभी कर्मचारियों को बाहर खदेड़ दिया और कार्यालय पर कब्जा कर लिया। लिबिया में पिछले कुछ महीनों से बिना कागजात के रहने वाले प्रवासियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा था, जिसके चलते आम जनता में नाराजगी देखने को मिल रही थी।

अधिकारियों ने खारिज की पुनर्वास की अफवाहें

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि संयुक्त राष्ट्र देश के अंदर प्रवासियों को बसाने यानी पुनर्वास कार्यक्रमों को शुरू करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन यानी UNSMIL और UNHCR ने इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और इन्हें सरासर झूठ बताया। संयुक्त राष्ट्र और IOM ने इस पूरी घटना पर कड़ी आपत्ति जताई और अपने कर्मचारियों तथा परिसरों पर हुए इन आक्रामक हमलों की तीखी निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रवासियों के खिलाफ फैलाई जा रही झूठी खबरों और भड़काऊ बयानों से समाज में हिंसा, भेदभाव और अविश्वास का माहौल तेजी से पैदा हो रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

सरकार ने शुरू की कानूनी कार्रवाई

इस पूरी हिंसा और तोड़फोड़ के बाद लिबियाई प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए। त्रिपोली स्थित लिबियाई विदेश मंत्रालय ने इस घुसपैठ की कड़ी शब्दों में निंदा की और कहा कि इस तरह की धमकियां कानून का खुला उल्लंघन हैं और दोषियों को हर हाल में सजा दी जाएगी। इसके अलावा उच्च राज्य परिषद के प्रमुख मोहम्मद ताकाला, प्रेसीडेंसी काउंसिल के सदस्य अब्दुल्लाह अल-लाफी और प्रशासनिक नियंत्रण प्राधिकरण के प्रमुख अब्दुल्लाह कादेरबौह ने भी सार्वजनिक रूप से बयान जारी किया। इन सभी बड़े अधिकारियों ने दोहराया कि लिबिया में किसी भी तरह के प्रवासी पुनर्वास कार्यक्रम को लागू नहीं किया जाएगा और वे इसका विरोध करते हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि देश में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन को निशाना बनाएं या वहां काम करने वाले कर्मचारियों की जान खतरे में डालें।

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