ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से अब तक तीन लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए और सख्ती से लागू की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

Gautam Sahu21 October 20262 min read0 viewsWorld
ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से अब तक तीन लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए और सख्ती से लागू की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

वॉशिंगटन: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को कड़ा करते हुए अब तक तीन लाख से ज्यादा वीजा रद्द कर दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि 20 अक्टूबर 2026 तक कुल 3 लाख से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं।

यह कार्रवाई बहुत तेजी से की गई है। इससे पहले 10 अगस्त 2026 तक यह संख्या 1.75 लाख थी। जनवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल की शुरुआत के बाद से वीजा रद्द करने की यह रफ्तार सबसे तेज रही है।

विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि अमेरिका के इतिहास में किसी भी अन्य प्रशासन की तुलना में अधिक तेजी से वीजा रद्द किए गए हैं। उन्होंने साफ किया कि जो वीजा धारक धोखाधड़ी करते हैं, कानून तोड़ते हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, उनके प्रति प्रशासन की नीति जीरो टॉलरेंस की है।

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व्हाइट हाउस के मुताबिक वीजा रद्द करने के लिए कई आधार तय किए गए हैं। इनमें आपराधिक गतिविधियां, सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा, इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार कम से कम 4 हजार वीजा बर्थ टूरिज्म से जुड़े होने के कारण रद्द किए गए। वहीं 6 हजार से ज्यादा वीजा उन विदेशी छात्रों के रद्द हुए जिन पर आपराधिक व्यवहार या आतंकवाद से संबंधों का आरोप था।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अगस्त में बनाए गए बर्थ टूरिज्म टास्क फोर्स ने अब तक चीनी नागरिकों के 700 से अधिक वीजा रद्द किए हैं। प्रशासन अब वीजा मिलने के बाद भी वीजा धारकों की सोशल मीडिया एक्टिविटी और डिजिटल जानकारी की जांच कर रहा है।

व्हाइट हाउस ने यह भी जानकारी दी कि सीमा सुरक्षा के कड़े उपायों की वजह से दक्षिणी सीमा से अवैध रूप से प्रवेश करने वालों की संख्या में पिछले प्रशासन के मुकाबले 95 प्रतिशत की कमी आई है। साल 2025 में अमेरिका में पहली बार पिछले 50 सालों में नेगेटिव नेट माइग्रेशन दर्ज किया गया।

दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द करना उचित कानूनी प्रक्रिया और अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है। आलोचकों का तर्क है कि इन कदमों से जातीय अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षित माहौल बन रहा है और यह नस्लीय प्रोफाइलिंग का मामला है।

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