ट्रंप ईरान डील पर बोले: "ईरान चाहता है, पर रास्ता नहीं जानता"

यंगस्टाउन, ओहायो: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अक्टूबर 2026 को ओहायो की एक रैली में दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता चाहता है, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे हो। ट्रंप ने ईरान पर सीधा हमला बोलते हुए उसे "आतंक का नंबर एक प्रायोजक देश" कहा। यानी ट्रंप ईरान डील को लेकर एक बार फिर सख़्त बयानबाज़ी के साथ मैदान में उतरे हैं, जबकि दोनों देशों के बीच हालात अभी भी ठहरे हुए हैं।
ट्रंप अपने भाषणों में लगातार 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों का ज़िक्र कर रहे हैं। इस रैली में उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हर हाल में रोकना होगा। एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को न्यूयॉर्क की रैली में उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान समझौता स्वीकार नहीं करता, तो वह "अब अस्तित्व में नहीं रहेगा।" ऐसे बयान ने कूटनीति की मेज़ पर पहले से तनी हुई स्थिति को और गर्म कर दिया है।
तेहरान का जवाब: प्रस्ताव "अपर्याप्त"
ईरान की ओर से जवाब भी उतना ही कड़ा आया है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने 11 और 12 अक्टूबर के बीच कहा कि अमेरिका का ताज़ा शांति प्रस्ताव नाकाफी है और उसमें और स्पष्टता की ज़रूरत है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर हालात बिगड़े तो क्षेत्र के डेटा सेंटर और संचार केबल भी निशाने पर आ सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने 12 अक्टूबर को बताया कि ईरान प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और जल्द ही अपना जवाबी मसौदा तैयार करेगा। बघाई ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की ओर लौटने की इच्छा जताई। साथ ही उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह परमाणु मुद्दों पर ज़ोर देकर बातचीत को टाल रहा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 8 अक्टूबर को साफ़ किया था कि किसी भी समझौते के लिए ईरान की संवर्धन क्षमता में बड़ी कटौती ज़रूरी है, खासकर 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम के उत्पादन पर रोक। दूसरी तरफ़ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का कहना है कि उसे किसी समन्वित परमाणु हथियार कार्यक्रम का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है, फिर भी संवर्धन गतिविधियों को लेकर उसकी चिंता बनी हुई है।
पृष्ठभूमि में टकराव कोई नया नहीं है। फरवरी 2026 से अमेरिका और ईरान एक-दूसरे के सामने खड़े हैं। ट्रंप ने पहले ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के बदले प्रतिबंध