ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, पेंटागन ने परमाणु ठिकानों पर हमले के विकल्प दिए
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य अभियान शुरू करने के संकेत दिए हैं। पेंटागन ने परमाणु ठिकानों पर हमले के विकल्प दिए हैं।

फ्लोरिडा: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बार फिर सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। उन्होंने इस मौजूदा संघर्ष को 'एपिक फ्यूरी' का नाम दिया है। शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान ट्रंप ने सवाल उठाया कि क्या इस युद्ध को तेजी से खत्म किया जाए या इसे धीरे-धीरे कम होने दिया जाए।
ट्रंप ने पहले कहा था कि 3 नवंबर के चुनाव से पहले कोई हमला नहीं होगा, लेकिन अब उन्होंने फिर से तीव्र लड़ाई शुरू करने की इच्छा जताई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने ट्रंप के सामने कई रणनीतिक विकल्प रखे हैं। इनमें ईरान के परमाणु केंद्रों, जरूरी बुनियादी ढांचे और द्वीपों पर हमले शामिल हैं।
इस तैयारी के बीच अमेरिकी युद्धपोत एक्शन के लिए तैयार हो रहे हैं। यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के कर्मी विमानों को तैयार करने और गोला-बारूद लोड करने में जुटे हैं। वहीं केप्लर के आंकड़ों से पता चला है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से अक्टूबर के मध्य तक ईरान के तेल भंडार खत्म हो गए थे।
तनाव के बीच ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य जहाजों का फारस की खाड़ी में प्रवेश वर्जित है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर यादल्लाह जवानी और प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने भी undersea कम्युनिकेशन केबल्स और अमेरिका से जुड़े डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पिछली बातचीत के विफल होने का जिम्मेदार अमेरिका को ठहराया है, हालांकि उन्होंने फिर से राजनयिक कोशिशों की अपील की है। दूसरी तरफ, ईरान द्वारा कथित हत्या की साजिशों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद अमेरिका ने लेबनान, यूएई, कतर और जॉर्डन से अपने राजनयिकों और उनके परिवारों को हटाना शुरू कर दिया है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि फारस की खाड़ी से तेल निर्यात फिलहाल युद्ध से पहले के स्तर से अधिक है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने पुष्टि की है कि आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, ताकि राजनयिक समाधान का रास्ता निकाला जा सके।