यूएन में ट्रंप और गल्फ नेताओं की अहम बैठक, ईरान संघर्ष और समुद्री सुरक्षा पर हुई चर्चा.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने न्यूयॉर्क में चल रही 81st United Nations General Assembly के दौरान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC और कई अन्य अरब देशों के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के प्रतिनिधियों के अलावा इराक और जॉर्डन के अधिकारी भी शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बाद अमेरिकी क्षेत्रीय रणनीति पर विचार करना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना था।
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति पर जोर
व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से हॉर्मूज जलडमरूमध्य और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में समुद्री परिवहन को सुरक्षित रखने पर चर्चा की गई। अमेरिकी प्रशासन इस संघर्ष को प्रबंधित करने और ईरानी प्रॉक्सी की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए काम कर रहा है। व्हाइट हाउस की आधिकारिक विज्ञप्ति के बारे में अधिक जानने के लिए आप White House Releases पर जा सकते हैं। इस कूटनीतिक सत्र में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत Mike Waltz भी शामिल रहे, जिन्होंने तेल आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं और हौती गतिविधियों से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर बात की।
ट्रंप का बयान और आगामी अमेरिकी चुनाव
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि उनके पास ईरान को पूरी तरह से तबाह करने की क्षमता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगामी अमेरिकी मध्यावती चुनावों के बाद एक नया समझौता सामने आ सकता है। अमेरिकी प्रशासन वर्तमान में युद्ध के बाद की एक क्षेत्रीय रणनीति तैयार कर रहा है जिसे नवंबर के चुनावों के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। कतर की समाचार एजेंसी QNA News पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जीसीसी महासचिव Jassem Mohamed Albudaiwi ने अंतर को पाटने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच बताया।
अरब नेताओं की प्रतिक्रिया
बैठक के दौरान यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार Dr. Anwar Gargash ने तेहरान और अरब देशों के बीच सीधे जुड़ाव के लिए एक नई मानसिकता अपनाने की वकालत की। क्षेत्रीय कूटनीति में बदलाव की यह मांग ऐसे समय में आई है जब पूरा खाड़ी क्षेत्र सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति Mahmoud Abbas को इस सत्र में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए अमेरिकी वीजा नहीं मिला, जिसके बाद महासभा ने वीडियो संबोधन के जरिए उनकी भागीदारी को मंजूरी दी। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी क्षेत्रीय स्थिरता बेहद जरूरी है क्योंकि इससे तेल की कीमतों और विमानन मार्गों पर सीधा असर पड़ता है।