डोनाल्ड ट्रंप ने ओहायो की रैली में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का किया बचाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओहायो में कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध शुरू नहीं किया। जानें ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और मानवीय मदद की स्थिति।

ओहायो: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक रैली के दौरान ईरान के साथ चल रहे युद्ध का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका ने इस लड़ाई की शुरुआत नहीं की है। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष की जड़ें 1979 के इतिहास में हैं।
ट्रंप ने 12 अक्टूबर को यंगस्टाउन और 28 अक्टूबर को चिलिकोट में चुनावी रैलियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ईरान के मिसाइल भंडार में भारी कमी आई है और बिजली की कमी की वजह से वहां ड्रोन बनाने वाली कंपनियां मुश्किलों का सामना कर रही हैं।
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए इस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के मध्य तक अमेरिकी करदाताओं का 47 अरब डॉलर से अधिक खर्च हो चुका है, जिसमें से करीब 29 अरब डॉलर केवल गोला-बारूद पर खर्च हुए हैं।
हालांकि, ट्रंप के दावों के विपरीत मई और जुलाई 2026 की खुफिया रिपोर्टों में बताया गया था कि युद्ध के दौरान ईरान के ड्रोन उत्पादन में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। यह उत्पादन विकेंद्रीकृत असेंबली तरीकों के जरिए किया गया था।
राजनयिक मोर्चे पर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार 28 अक्टूबर को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ाई से संपर्क कर मानवीय सहायता की पेशकश की। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संपर्क की मंजूरी देने की बात स्वीकार की, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने वेंस को शांति वार्ता शुरू करने का निर्देश दिया था।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को कहा कि तेहरान मध्यस्थों के साथ एक प्रस्ताव पर काम कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका द्वारा पहले की गई अस्वीकृतियों के बावजूद ईरान राजनयिक रास्तों को तलाश रहा है।
क्षेत्रीय स्तर पर संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से समझदारी बरतने की अपील की है ताकि पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान दोबारा शुरू न हो। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने अपने सहयोगियों को चेतावनी दी है कि वे मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के संभावित जवाबी हमलों के लिए तैयार रहें।
खुफिया आकलन बताते हैं कि मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिससे प्रॉक्सी समूहों को फंड देने की उसकी क्षमता प्रभावित हुई है। 2026 के संघर्ष से पहले ईरान के पास 3,000 से 4,000 मिसाइलें थीं, लेकिन अमेरिकी और आईडीएफ के हवाई हमलों के बाद शुरुआती हफ्ते में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च में 86 प्रतिशत की कमी आई।