डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता की खबरों को नकारा और बताया मेडिकल सप्लाई का मामला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति बातचीत की खबरों का खंडन किया है और इसे केवल मेडिकल सप्लाई से जुड़ी बातचीत बताया है।

वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता शुरू करने की खबरों का पूरी तरह खंडन किया है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को ईरान के साथ किसी भी तरह की शांति बातचीत शुरू करने का निर्देश नहीं दिया है।
ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ हाल ही में जो भी बातचीत हुई है, वह केवल मेडिकल सप्लाई के आदान-प्रदान तक सीमित थी। यह बयान वॉल स्ट्रीट जर्नल सहित कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों की उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू हो रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ई को एक औपचारिक पत्र भेजा था। कहा जा रहा था कि इस पत्र का मकसद रुकी हुई कूटनीतिक बातचीत को दोबारा शुरू करना और संवाद के लिए एक ढांचा तैयार करना था, ताकि दोनों देशों के बीच साझा सहमति तलाशी जा सके।
ऐसी खबरें थीं कि इस पहल का उद्देश्य सैन्य टकराव को रोकना था, क्योंकि ट्रंप 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य हमले पर विचार कर रहे हैं। इस साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। जून में हस्ताक्षरित एक समझौता महज दो हफ्तों में ही विफल हो गया था।
इसके बाद कतर और पाकिस्तान ने भी मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। 28 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले शांति समझौते को समय की बर्बादी बताते हुए कहा कि उन्हें वह समझौता कभी पसंद नहीं आया।
दूसरी तरफ, ईरानी अधिकारी मोहसिन रज़ई ने पिछले हफ्ते कहा था कि जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तेहरान वॉशिंगटन के साथ किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा। इन तमाम दावों के बावजूद व्हाइट हाउस का कहना है कि संचार का उद्देश्य केवल मानवीय मुद्दों तक ही सीमित था।