डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर्थिक और सैन्य तौर पर कड़े प्रहार की चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान को अपना रास्ता बदलना होगा

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका वर्तमान में तेहरान को आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर बेहद कड़े प्रहार कर रहा है। 19 अक्टूबर 2026 को व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अपनी मौजूदा राह नहीं बदली, तो अमेरिका जल्द ही इस काम को पूरा कर सकता है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर इजरायल का नेतृत्व सही नहीं रहा, तो अमेरिका को यह पूरी कोशिश अकेले ही करनी पड़ सकती है। यह तनाव उस समय बढ़ रहा है जब फरवरी 2026 से शुरू हुआ क्षेत्रीय संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी रुख के जवाब में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने दावा किया कि अमेरिका एक नया संघर्ष शुरू करने की स्थिति में नहीं है। वहीं, डिप्टी कमांडर मोस्तफा इज़ादी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसेना के जहाज ईरानी मिसाइल हमलों से बचने के लिए 700 किलोमीटर पीछे हट गए हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में मौजूदा असुरक्षा के लिए अमेरिका और इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध और आर्थिक नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया है। इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अपने दुश्मनों को हराने का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इस्लामिक रिपब्लिक को गिराना उनका प्राथमिक लक्ष्य बना हुआ है।
क्षेत्रीय युद्ध को रोकने और तनाव कम करने के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 19 अक्टूबर को तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अराघची से मुलाकात की।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है, जहां सितंबर में प्रति सप्ताह करीब 30 हमलों के बाद अक्टूबर में अब तक 20 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान की वित्तीय लाइफलाइन को तोड़ने के लिए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' लागू कर रहा है।
अमेरिकी सेना इस जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए फाइटर जेट, ड्रोन और स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स के जरिए रोजाना अभियान चला रही है। इससे पहले अगस्त में एक युद्धविराम समाप्त हो गया था और सितंबर में ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसमें नाकेबंदी और प्रतिबंधों को खत्म करने के बदले जलमार्ग खोलने और परमाणु बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी।