ट्रंप का बड़ा दांव: चुनाव से पहले ईरान पर सैन्य हमले की तैयारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने पेंटागन को निर्देश दिया है कि वह चुनाव की तारीख से पहले संभावित हमलों के विभिन्न परिदृश्यों (scenarios) को तैयार करे। इस पूरी रणनीतिक योजना की कमान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के हाथों में है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ चल रहे आठ महीने लंबे युद्ध में कुछ ठोस प्रगति दिखाना चाहते हैं। इसके अलावा, इस कदम के पीछे एक बड़ा आर्थिक मकसद भी है। अमेरिकी सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले ऊर्जा की कीमतों में कमी आए और पेट्रोल के दाम गिरें, ताकि मतदाताओं पर इसका सकारात्मक असर पड़े।
पेंटागन की योजना और आंतरिक मतभेद
पेंटागन ने राष्ट्रपति के सामने कई विकल्प रखे हैं, जिनमें ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (energy infrastructure) को निशाना बनाने वाले सीमित हमलों से लेकर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शामिल हैं। हालांकि, अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि हमला किस स्तर का होगा या उसके सटीक लक्ष्य क्या होंगे।
इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस के भीतर ही दो गुट बन गए हैं। कुछ सलाहकार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर युद्ध फिर से भड़कता है और अमेरिकी सैनिकों की जान जाती है, तो इसका असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों के चुनावी नतीजों पर बुरा पड़ सकता है। दूसरी तरफ, कुछ लोगों का तर्क है कि सीमित हमले ट्रंप की मजबूती को दर्शाएंगे और उन्हें राजनीतिक बढ़त दिलाएंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने समय को लेकर रहस्य बनाए रखा है। उन्होंने संकेत दिया है कि जीत चुनाव के तुरंत बाद मिल सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि "शायद चुनाव से पहले ही"। ट्रंप ने खुले तौर पर धमकी दी है कि यदि तेहरान ने समझौते से इनकार किया, तो वह "इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह नष्ट" कर देंगे।
हालांकि, अधिकारियों का यह भी मानना है कि केवल सीमित सैन्य हमलों से ईरान को बातचीत की मेज पर लाना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना या चुनाव तक पेट्रोल की कीमतों को कम करना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से पेंटागन ने चुनाव के बाद के लिए भी कुछ आकस्मिक योजनाएं (contingency plans) तैयार रखी हैं।