Donald Trump का IMEC कॉरिडोर को बड़ा समर्थन, भारत और गल्फ देशों के व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी IMEC को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि उनका प्रशासन इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का पूरी तरह समर्थन करता है। इस प्रोजेक्ट के जरिए ईरान के चेकपॉइंट्स से ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को दूर ले जाने की योजना है ताकि व्यापार और ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित रह सके। इस बीच जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के चीनी अध्ययन के प्रोफेसर Srikanth Kondapalli ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है और बताया है कि अमेरिकी समर्थन मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ सकता है।
IMEC प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने के पीछे क्या है मुख्य वजह
प्रोफेसर Srikanth Kondapalli ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि IMEC प्रोजेक्ट पर दोबारा बात शुरू होने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं। पहला कारण यह है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को स्थिर करना और व्यापार को फिर से पटरी पर लाना है। दूसरा कारण Saudi Arabia और UAE द्वारा अमेरिका को दिए गए निवेश का सही इस्तेमाल करना है। तीसरा कारण यूरोप की इस क्षेत्र में बढ़ती हुई रुचि है क्योंकि भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ और स्कैंडिनेवियाई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA किया है। इसके अलावा ओमान के साथ भी समझौता हुआ है और I2U2 प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है।
2023 के जी20 समिट में रखी गई थी इस प्रोजेक्ट की नींव
आपको बता दें कि इस मल्टी-बिलियन डॉलर और बहु-मोडल प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 Leaders Summit के दौरान हुई थी। इसमें भारत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य वैश्विक साझीदारों के बीच सहमति बनी थी। यह गलियारा दो हिस्सों में बंटा होगा जिसमें पूर्वी गलियारा भारत को गल्फ देशों से जोड़ेगा और उत्तरी गलियारा गल्फ देशों को यूरोप से जोड़ेगा। विदेश मंत्रालय के पहले दिए गए बयानों के अनुसार इस प्रोजेक्ट का मकसद कनेक्टिविटी बढ़ाना, लागत कम करना, क्षेत्रीय सप्लाई चेन को सुरक्षित करना, नौकरियां पैदा करना और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है।
संघर्ष के बीच समुद्री मार्ग पर हो सकता है जल्द काम
गाजा संघर्ष और ईरान से जुड़े तनाव की वजह से इस प्रोजेक्ट की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कुछ महीने पहले ही इस प्रोजेक्ट के निर्माण को गति देने के लिए इटली का दौरा किया था। सऊदी अरब और यूएई की तरफ से भी लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में दिलचस्पी दिखाई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति के खुले समर्थन के बाद अब उन हिस्सों पर काम शुरू हो सकता है जो सीधे तौर पर पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से दूर हैं। भारत और पश्चिम एशिया के बीच समुद्री क्षेत्र में जैसे अंडरसी केबल और अंडरसी ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क पर काम किया जा सकता है क्योंकि यह क्षेत्र लाल सागर और ईरान से दूर सुरक्षित माने जाते हैं। मार्च महीने तक कई यूरोपीय देशों द्वारा भारत-यूई एफटीए का समर्थन करने की उम्मीद है जिससे इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।