ट्रंप ने माना: ईरान युद्ध से महंगाई बढ़ी, इसी वजह से रिपब्लिकन चुनाव हारे
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध के कारण 2026 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने 2026 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार में बड़ी भूमिका निभाई। इन चुनावों के बाद अब अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा हो गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, मतदाताओं ने इस संघर्ष के आर्थिक परिणामों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि महंगाई और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है।
चुनावी झटके के बावजूद ट्रंप ने अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत बताया। उन्होंने दावा किया, "मैं मतपत्र पर नहीं था और अगर मैं होता, तो हम भारी बहुमत से जीतते!" साथ ही उन्होंने अपनी सरकार की ईरान नीति का बचाव करते हुए कहा कि इससे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल हुए हैं।
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ था, जो क्षेत्रीय तनाव का मुख्य कारण बना हुआ है। मतदान से ठीक पहले के दिनों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका ने सीमित हमले किए थे।
सत्ता के इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी मतदाताओं ने प्रभावी रूप से "युद्ध को ना" कहा है। गालिबाफ ने कहा कि ईरान इस संदेश का समर्थन करता है।
अब डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली विधायिका के सामने राष्ट्रपति ट्रंप ने उन उपायों के खिलाफ अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करने की कसम खाई है, जिन्हें वह "पागलपन" मानते हैं। खुद को "मिस्टर वीटो" बताते हुए उन्होंने आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
हालांकि, राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि वह नई डेमोक्रेटिक बहुमत वाली सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती विधायी टकराव के बाद दोनों दल अंततः सहयोग का रास्ता खोज सकते हैं।