ट्रंप ने की ईरान परमाणु वार्ता की पुष्टि, चुनाव से पहले हमले से किया इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा अपडेट दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' के जरिए घोषणा की है कि वाशिंगटन और ईरान के बीच इस मुद्दे पर "उत्पादक चर्चा" चल रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि 3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाएगा।
हालांकि, कूटनीतिक बातचीत के बावजूद ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरानी बंदरगाहों पर लगा अमेरिकी नाकाबंदी (blockade) पूरी तरह प्रभावी बनी रहेगी। उन्होंने ईरान की मौजूदा स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि ईरान आर्थिक और सैन्य, दोनों ही मोर्चों पर "बहुत बुरी हालत" में है। ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि उनका प्रशासन किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
कतर की मध्यस्थता और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य पिछले सात महीनों से जारी संघर्ष को खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलना है। खबरों के मुताबिक, इसी महीने न्यूयॉर्क में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैठकें भी हुई हैं।
जहाँ एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी ओर कुछ रिपोर्टें संकेत दे रही हैं कि ईरान की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के कारण शिपमेंट की रफ्तार धीमी हुई है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहरे हैं।
- अमेरिका का रुख: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जोर दिया है कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता में "सार्थक कमी" लानी होगी।
- ईरान का रुख: ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि ईरान न तो यूरेनियम संवर्धन छोड़ेगा और न ही अपने मौजूदा स्टॉक का त्याग करेगा।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिनों का एक प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसकी शर्त यह थी कि अमेरिका अपनी समुद्री नाकाबंदी हटा ले। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पार्टनर्स के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक की है, जिसमें पुष्टि की गई कि नाकाबंदी के कारण ईरानी तेल निर्यात पर लगा प्रतिबंध प्रभावी रहा है।