ट्रंप बोले ईरान से बातचीत सही चल रही, तेहरान की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को सकारात्मक बताया, वहीं ईरान ने किसी भी हमले पर बड़े जवाबी हमले की चेतावनी दी है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बताया कि ईरान के साथ चल रही राजनयिक बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरानी पक्ष की विश्वसनीयता में कमी इस पूरी प्रक्रिया में बाधा बन रही है।
दोनों देशों के बीच यह बातचीत कतरी मध्यस्थों के जरिए हो रही है, जो तेहरान और क्षेत्रीय राजधानियों के बीच आवाजाही कर रहे हैं। इसके बावजूद, दोनों तरफ से तीखी बयानबाजी जारी है, जिससे सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के अधिकांश सैन्य और परमाणु बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ एक या दो विशिष्ट लक्ष्य बचे हैं, जिनमें 'पिकएक्स माउंटेन' नाम की एक संदिग्ध परमाणु साइट शामिल है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका इन बचे हुए लक्ष्यों को महज 10 मिनट में नष्ट करने की क्षमता रखता है।
दूसरी तरफ, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका या इजरायल की ओर से किसी भी नए हमले का जवाब 'तत्काल, प्रभावशाली और भौगोलिक रूप से असीमित' होगा। ईरानी सैन्य प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नया संघर्ष क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा और यह पिछली शत्रुता से अधिक लंबा खिंच सकता है।
राजनयिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई को एक पत्र भेजकर बातचीत के लिए एक ढांचा प्रस्तावित किया है। ईरानी अधिकारियों ने पत्र मिलने की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी सीधी बैठक की योजना नहीं है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि अमेरिका राजनयिक समाधान के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नए हमलों को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, हालांकि जरूरत पड़ने पर सेना कार्रवाई करने में सक्षम है।
इस अस्थिरता पर नजर रखे हुए संयुक्त अरब अमीरात ने उम्मीद जताई है कि कोई समाधान निकलेगा, लेकिन साथ ही युद्ध की स्थिति के लिए तैयारी भी की जा रही है। यह संघर्ष फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था।
3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के कारण यह मामला और संवेदनशील हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले चुनावों से पहले नए हमलों से बचने का वादा किया था, लेकिन उसके बाद की सैन्य रणनीति पर उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। वहीं, ईरानी संसद के उपाध्यक्ष सहित सरकार के कुछ हिस्सों ने दबाव में परमाणु मुद्दों पर बातचीत करने से इनकार कर दिया है।