ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई कर सकता है अमेरिका, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी और तेल भंडार जब्त करने की बात कही
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और सैन्य अभियान चलाने की संभावना जताई है। शुक्रवार को ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मौजूदा संघर्ष को तेजी से खत्म कर सकता है, हालांकि वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इसे जल्द सुलझाया जाए या धीरे-धीरे तनाव कम किया जाए।
ट्रंप ने गुरुवार को यह दावा किया था कि अमेरिका पहले ही ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कम कर चुका है। उन्होंने तेहरान पर आरोप लगाया कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले ऊर्जा की कीमतें बढ़ाने के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकर हमलों की झूठी खबरें फैलाई गईं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास ईरान के तेल भंडार और उसके इलाके पर कब्जा करने की क्षमता है।
इस बीच अमेरिकी प्रशासन के भीतर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं। तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने संकेत दिया कि सप्ताहांत तक हमले हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि शासन बदलना उनका मकसद नहीं है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले किसी हमले की योजना नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि बातचीत की उम्मीदों के बावजूद यह संघर्ष एक साल तक खिंच सकता है।
ईरान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश कूटनीति और युद्ध दोनों के लिए तैयार है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या इजरायल ने फिर से हमला किया, तो तेहरान अपनी सभी 'रेड लाइन्स' छोड़ देगा, जिसमें फारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाना भी शामिल है।
क्षेत्र में तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट के साथ एक मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट तैनात की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने ईरान के परमाणु, मिसाइल और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए कई दिनों तक चलने वाले हमलों का खाका तैयार किया है।
कूटनीतिक स्तर पर तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के मंत्रियों ने शुक्रवार को इस्तांबुल में एक 'युद्ध-विरोधी गुट' के रूप में बैठक की। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने कहा कि सैन्य हस्तक्षेप कोई समाधान नहीं है और उन्होंने अमेरिका व इजरायल से फिर से दुश्मनी न बढ़ाने की अपील की।
यह अस्थिरता फरवरी के अंत से शुरू हुई है, जिसके बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा है कि उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास सात टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया है। 23 अक्टूबर को यूएई में तेल रिसाव की खबर भी आई है। इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले मंगलवार को होने वाले चुनावों की तैयारी कर रहे हैं और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन अगले हफ्ते मास्को में व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे।