डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में नाटो देशों की मदद मांगकर उन्होंने उनकी प्रतिबद्धता की परीक्षा ली

पार्क सिटी (कंसास): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में जब उनके प्रशासन ने नाटो से मदद मांगी थी, तो वह दरअसल इस गठबंधन की परीक्षा ले रहे थे। 19 अक्टूबर 2026 को एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका को किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं थी।
ट्रंप ने बताया कि वह यह देखना चाहते थे कि क्या सदस्य देश अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेंगे, क्योंकि अमेरिका इस गठबंधन में भारी वित्तीय योगदान देता है। इसी दौरान उन्होंने ईरान के साथ बातचीत की संभावनाओं पर संदेह जताया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ईरान में अब किससे बातचीत की जाए। उनके मुताबिक ईरान के नेतृत्व का पहला और दूसरा स्तर खत्म हो चुका है और तीसरा स्तर भी आधा खत्म हो गया है।
अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ यह युद्ध करीब 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। 20 अक्टूबर 2026 को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एक फोन कॉल का वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के मामले में दोनों देशों को अपना काम पूरा करना है।
दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों ने सैन्य कार्रवाइयों को अवैध बताते हुए रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की बात कही। चीन के प्रीमियर ली कियांग ने भी इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सलाह के बिना किया गया खुल्लम-खुल्ला हमला बताया है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने धमकी दी है कि अगर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रही, तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाएंगे।
सितंबर 2026 में ईरान ने सात दिन के युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में नौसैनिक नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाने की शर्त थी, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने खारिज कर दिया था। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वह आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर ईरान पर दबाव बनाना जारी रखेगा।