डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म होगा और इससे पेट्रोल की कीमतें गिरेंगी

हाईलैंड हाइट्स (केंटकी): पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक चुनावी रैली के दौरान घोषणा की है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान में अपनी कार्रवाई से वहां की परमाणु क्षमता को खत्म कर दिया है।
ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि इस संघर्ष के समाप्त होते ही पेट्रोल की कीमतें पहले के स्तर से भी नीचे गिर जाएंगी। उन्होंने एक बार फिर यह संकल्प दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि ईरान के पास अभी भी लगभग 440 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक मौजूद है। साल 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में पिकैक्स माउंटेन नामक संदिग्ध परमाणु स्थल पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य देखा गया है।
ट्रंप ने बीते गुरुवार को पुष्टि की थी कि अमेरिका इस स्थल को एक संभावित लक्ष्य के रूप में देख रहा है। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया, लेकिन पारंपरिक हवाई हमलों के लिए 'मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट' (MOAB) के इस्तेमाल की संभावना को खुला रखा है।
क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया है। 16 और 17 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, इस इलाके में कई टैंकरों पर हमले हुए हैं और रियाद के ऊपर ड्रोन को रोका गया है। अमेरिका और ईरान दोनों ही इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने का दावा कर रहे हैं।
यह संघर्ष फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जिसके बाद अप्रैल में हुए युद्धविराम और जून के समझौते दोनों ही विफल रहे। सितंबर 2026 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने नियमों का पालन न करने पर ईरान की रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजने के पक्ष में मतदान किया, जिसका रूस और चीन ने विरोध किया।
ईरान ने जून 2025 से ही IAEA के निरीक्षकों को बमबारी वाले केंद्रों में जाने की अनुमति नहीं दी है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 17 अक्टूबर को कहा कि अब ईरान को यह चुनना होगा कि वह बातचीत के जरिए अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़े या फिर विनाशकारी सैन्य कार्रवाई का सामना करे।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही अमेरिकी दृष्टिकोण का समर्थन किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को एक बड़ा खतरा बताया है।