अमेरिका ने ठुकराया ईरान का ऑफर, हॉर्मूज जलडममध्य पर तनाव बढ़ने से क्रूड ऑयल के दाम बढ़े.

Sushma Kumari28 September 20263 min read3 viewsSaudi
अमेरिका ने ठुकराया ईरान का ऑफर, हॉर्मूज जलडममध्य पर तनाव बढ़ने से क्रूड ऑयल के दाम बढ़े.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मूज जलडममध्य को दोबारा खोलने के लिए ईरान के सात दिन के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कहा कि तेहरान यह कदम अपनी कमजोरी छिपाने के लिए उठा रहा है। इस बड़े घटनाक्रम के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तनाव और हूती विद्रोहियों की मिसाइल गतिविधियों को देखते हुए सऊदी अरब की सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए रियाद के सभी स्कूलों में अगले एक हफ्ते के लिए ऑनलाइन यानी रिमोट लर्निंग लागू कर दी है, ताकि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ईरान का प्रस्ताव और कतर के माध्यम से बातचीत

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटा ले, तेल प्रतिबंधों में ढील दे और रोके गए फंड को जारी कर दे, तो ईरान सात दिन के भीतर हॉर्मूज जलडममध्य को फिर से खोल देगा और परमाणु समझौते पर बातचीत शुरू करेगा। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिए कि इस हफ्ते दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर जारी रह सकता है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ किया है कि तेहरान अपनी शर्तों पर कायम है और सार्वजनिक बयानों के बजाय मध्यस्थता चैनलों के जरिए औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

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समुद्री यातायात और सुरक्षा के हालात

खाड़ी क्षेत्र में पानी के जहाजों की आवाजाही को लेकर स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। हालांकि कतर से जुड़े कुछ एलएनजी टैंकर जलडममध्य के पास दिखाई दिए हैं, लेकिन ज्यादातर कमर्शियल जहाजों के रूट बदल दिए गए हैं। लाल सागर के रास्ते और पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हूती हमलों के बाद सऊदी अरब अभी भी अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए हॉर्मूज जलडममध्य का इस्तेमाल कर रहा है। रविवार को ईरान के नौसेना प्रमुख ने फारस की खाड़ी और जलडममध्य पर पूर्ण नियंत्रण होने का दावा किया था, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने तुरंत खारिज कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन को सुरक्षित रखने के लिए उनकी नौसेना लगातार जहाजों को सुरक्षा दे रही है।

हूती हमलों का असर और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों की चिंता

ईरान समर्थित हूती आंदोलन के हमलों ने रियाद, यानबू, जाजान और सऊदी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाया है। हालांकि सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन का दावा है कि उन्होंने हवा में ही ज्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया है, लेकिन हूती बलों का कहना है कि उन्होंने संवेदनशील ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इस लगातार तनाव के कारण यूएई, बहरीन, कतर और ओमान में काम करने वाले प्रवासी मजदूर बहुत ज्यादा परेशान हैं। खाड़ी देशों में रह रहे लाखों प्रवासियों के सामने इंश्योरेंस की बढ़ती कीमतें और आपातकालीन निकासी का खतरा मंडरा रहा है। कतर और ओमान जहां अभी भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे हुए हैं, वहीं यूएई ने बहुत सख्त सैन्य रुख अपनाया है, और बहरीन अमेरिकी पांचवें बेड़े की मेजबानी करते हुए ईरान और खाड़ी की बैठकों से थोड़ी दूरी बनाए हुए है।

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में इस अनिश्चितता का साफ असर दिख रहा है, और टैंकर ऑपरेटर किसी भी बड़े खतरे से बचने के लिए ओमान और फुजैराह के तटों पर जहाज-से-जहाज के जरिए तेल ट्रांसफर कर रहे हैं। इस सात7 दिन के प्रस्ताव के फेल होने के बावजूद, अमेरिका और ईरान दोनों देशों के अधिकारियों ने यह माना है कि मौजूदा गतिरोध को खत्म करने के लिए बातचीत ही सबसे पहला रास्ता है। खाड़ी देशों में नौकरी और कारोबार के सिलसिले में रह रहे भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने और सुरक्षा हालात खराब होने का सीधा असर आम आदमी की जिंदगी और जेब पर पड़ता है।

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