राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीधी बातचीत से किया इनकार और जल्द किसी बड़े एक्शन के दिए संकेत

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनका प्रशासन फिलहाल ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले समय में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
न्यूजनेशन की व्हाइट हाउस संवाददाता लिब्बी डीन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनका मुख्य ध्यान ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर है। हालांकि कई लोग नवंबर 3 को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद किसी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने सभी विकल्पों को खुला रखा है।
खबरों के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान के परमाणु, ऊर्जा और मिसाइल केंद्रों पर कम समय के लिए तीव्र हमले करने की योजना बनाई है। इस योजना पर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच चर्चा हुई है।
इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 21 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की घोषणा की है। इसके तहत ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाली अवैध फंडिंग रोकने के लिए सिंगापुर, यूएई, पनामा और ग्रीस के शिपिंग एजेंटों और एक लॉ फर्म पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
ईरान की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने वाशिंगटन के प्रति गहरा अविश्वास जताते हुए प्रतिबंधों और धमकियों को हटाने की मांग की है। वहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी और जमी हुई संपत्तियों के मुद्दे को सुलझाया जा सके।
दूसरी ओर, आईआरजीसी प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने चेतावनी दी है कि ईरान अब अपनी रक्षा रणनीति को आक्रामक बना रहा है। उन्होंने धमकी दी कि अगर कोई सैन्य कार्रवाई हुई तो ईरान 'फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' नाम का हथियार पेश करेगा।
यह तनाव 18 सितंबर 2026 को लागू हुए लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के बाद बढ़ा है। इस अस्थिरता के कारण अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व के कई ठिकानों पर अपनी मौजूदगी कम कर दी है। साथ ही, ईरान समर्थित समूहों की धमकियों के चलते विदेश विभाग ने कुछ राजनयिकों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है।