ईरान पर सैन्य हमले से डोनाल्ड ट्रंप का इनकार, मिडटर्म चुनाव तक टला खतरा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह नवंबर 3 को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेंगे। ट्रंप के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच "उत्पादक चर्चाएं" चल रही हैं, जिसके चलते उन्होंने फिलहाल सैन्य कार्रवाई से परहेज करने का फैसला लिया है। हालांकि, उन्होंने यह साफ कर दिया है कि ईरान पर लगा अमेरिकी नाकाबंदी का दबाव पूरी तरह जारी रहेगा और इसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।
भले ही राष्ट्रपति ने फिलहाल शांति का संकेत दिया है, लेकिन पर्दे के पीछे की स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। खबरों के अनुसार, व्हाइट हाउस ने पहले पेंटागन को चुनाव से पहले ईरान के ठिकानों पर हमले के विकल्प तैयार रखने के निर्देश दिए थे। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास अभी भी सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो चुकी है और अब उनके सामने दो ही रास्ते हैं—या तो वे आसान रास्ता चुनें या फिर मुश्किल रास्ता।
मध्यस्थता और तनावपूर्ण कूटनीति
इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए कतर की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सात महीने से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। ईरान ने हाल ही में एक "सात दिवसीय योजना" का प्रस्ताव रखा था, जिसमें प्रतिबंध हटाने और संपत्तियां फ्रीज करने के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की बात कही गई थी, जिसके बाद परमाणु चर्चाएं शुरू होतीं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने मौजूदा प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के कारण अमेरिका के साथ सीधी बातचीत को "अर्थहीन" बताया है। इसके बावजूद, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है और तेहरान अमेरिकी फीडबैक की समीक्षा कर रहा है।
क्षेत्रीय माहौल अभी भी बेहद संवेदनशील है। फारस की खाड़ी में एक टैंकर पर मिसाइल हमला और सऊदी हवाई अड्डों पर हूतियों के घातक हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है। इन सबके बीच, डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ इस गतिरोध में अमेरिका की स्थिति बेहद मजबूत है और उन्होंने ईरानी सेना को पूरी तरह "पस्त" बताया है।