अमेरिका में जिनपिंग का स्वागत, ट्रंप ने तोड़ा 60 साल पुराना प्रोटोकॉल.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की राजकीय यात्रा को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। वाशिंगटन के पास स्थित Joint Base Andrews पर अमेरिकी राष्ट्रपति खुद चीनी राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए पहुंचेंगे। इस मुलाकात के साथ ही अमेरिका में लगभग 60 वर्षों से चला आ रहा पुराना प्रोटोकॉल टूट जाएगा। यह जानकारी प्रतिष्ठित अखबार Financial Times की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई है।
चीन के राष्ट्रपति की अमेरिकी यात्रा
चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping अपनी इस महत्वपूर्ण यात्रा के तहत 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका में रहेंगे। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों और वैश्विक राजनीति के लिहाज से इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन में प्रोटोकॉल प्रमुख Monica Crowley ने इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप का टारमैक पर जाकर व्यक्तिगत रूप से स्वागत करना एक बेहद दुर्लभ कदम है।
ऐतिहासिक परंपरा और पिछला वाकया
बुधवार को होने वाली इस मुलाकात को लेकर अमेरिकी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। यह पहला मौका होगा जब कोई अमेरिकी कमांडर-इन-चीफ किसी विदेशी विश्व नेता का एयरबेस पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत करने पहुंचेगा। इससे पहले साल 1962 में तत्कालीन राष्ट्रपति John F. Kennedy ने टारमैक पर यूके के प्रधानमंत्री Harold Macmillan का स्वागत किया था। उसके बाद से आज तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तरह का कदम नहीं उठाया था।
शी जिनपिंग के प्रति गहरा सम्मान
फाइनेंशियल Times की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम चीनी राष्ट्रपति के प्रति उनके गहरे सम्मान को प्रदर्शित करता है। कूटनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि ट्रंप इस मुलाकात के जरिए चीन के साथ संबंधों को एक नई दिशा देना चाहते हैं। इससे पहले भी राष्ट्रपति ट्रंप इस तरह के कदम उठा चुके हैं। उन्होंने अगस्त 2025 में अलास्का के शहर एंकोरेज के पास स्थित Joint Base Elmendorf-Richardson हवाई अड्डे पर रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का भी टारमैक पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया था। अब देखना यह है कि इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद वैश्विक कूटनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।