हूतियों के खिलाफ इजरायल की मदद ले सऊदी अरब, व्हाइट हाउस के बाहर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी सलाह

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब से अपील की है कि वह हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रही जंग में इजरायल द्वारा दी जा रही सैन्य मदद के प्रस्ताव को स्वीकार करे। व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इजरायल की यह मदद बहुत मददगार साबित होगी।
ट्रंप ने भरोसा जताया कि सऊदी अरब आखिरकार इस प्रस्ताव को मान लेगा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि वे ऐसा करेंगे, बिल्कुल करेंगे। यह बयान क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और तनाव के बीच आया है।
इसी दिन सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि उन्होंने रियाद और दक्षिणी सऊदी अरब के पास तीन ड्रोन को रोका है। इसके अलावा लाल सागर के ऊपर दो क्रूज मिसाइल और यनबू के ऊपर एक बैलिस्टिक मिसाइल को भी नाकाम किया गया।
तनाव तब और बढ़ गया जब हूतियों ने किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और एयरपोर्ट को कम से कम 17 अक्टूबर 2026 तक बंद रखना पड़ा। जवाब में सऊदी सेना ने सना में यमन पेट्रोलियम कंपनी के अल-सबाह सेंट्रल स्टेशन पर हमले किए हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की कि मध्य पूर्व के कई देशों ने इजरायल से मदद मांगी है, हालांकि उन्होंने सऊदी अरब की ओर से किसी औपचारिक अनुरोध की पुष्टि नहीं की। हारेट्ज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए सीधी सैन्य सहायता देने की कोशिश की है, लेकिन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस सहयोग को खुले तौर पर अपनाने में झिझक रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रियाद पर हुए हूती हमलों की औपचारिक निंदा की है। सऊदी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान इस मिलिशिया को हथियार और समर्थन दे रहा है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हूतियों के अभियान स्वतंत्र हैं और ईरान विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश करता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को फिर से सामान्य किया जा सकता है। ये संबंध अब्राहम समझौते के तहत बने थे, लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद ठंडे पड़ गए थे। सऊदी नेतृत्व का कहना है कि संबंधों को सामान्य करने के लिए फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण का स्पष्ट रास्ता होना जरूरी है।