डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ इजरायल की मदद लेने की सलाह दी

रियाद: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब से अपील की है कि वह यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे संघर्ष में इजरायल की मदद स्वीकार करे। 16 अक्टूबर 2026 को दिए गए एक बयान में ट्रंप ने इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि सऊदी अरब ऐसा करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल पहले भी सऊदी साम्राज्य के लिए काफी मददगार रहा है।
ट्रंप ने अब्राहम समझौते के विस्तार को लेकर भी उम्मीद जताई और संकेत दिया कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु सहयोग को रियाद द्वारा इजरायल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य करने की इच्छा से जोड़ा जा सकता है।
यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है। 10 अक्टूबर 2026 को हूतियों ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया था, जिसमें एक अमेरिकी नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हो गई और 300 लोग घायल हुए। इस हमले के बाद सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया। दूतावास ने बताया कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर परिचालन 17 अक्टूबर 2026 तक निलंबित रहेगा और सरकारी कर्मचारियों को सऊदी हवाई अड्डों से यात्रा के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।
हिंसा यहीं नहीं रुकी और 14 अक्टूबर को दهران में अरामको मुख्यालय को निशाना बनाया गया। इसके बाद 15 अक्टूबर को यमन के अदन स्थित राष्ट्रपति महल पर हुए हमले में पांच लोगों की जान चली गई और 16 अन्य घायल हो गए।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 16 अक्टूबर को क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर बात करते हुए कहा कि मध्य पूर्व के कई देशों ने इजरायल से सहायता मांगी है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हूतियों द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है और रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले को लापरवाह बताया है।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निंदा का समर्थन किया है। मंत्रालय ने हूतियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों को पूरी तरह लागू करने की जरूरत बताई है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि मक्का और मदीना को छोड़कर सऊदी अरब के अन्य हवाई अड्डे अब सुरक्षित क्षेत्र नहीं हैं।