रूसी तेल खरीदने पर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी से दी राहत

Gautam Sahu17 October 20263 min read0 viewsWorld
रूसी तेल खरीदने पर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी से दी राहत

वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी करते हुए रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच आयातकों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी को फिलहाल टाल दिया है। 16 अक्टूबर 2026 को जारी इस अस्थायी राहत के बाद अब उन नए शुल्कों को तुरंत लागू नहीं किया जाएगा, जो 18 अक्टूबर 2026 से व्यापार को प्रभावित करने वाले थे।

व्हाइट हाउस ने बताया कि यह कदम लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 की धारा 115 के तहत उठाया गया है। 18 सितंबर 2026 को लागू हुए इस कानून के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया था कि यदि रूसी ऊर्जा के पांच सबसे बड़े आयातक समय सीमा के बाद नई खरीदारी करते हैं, तो उन पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।

इस आदेश के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्राहम एक्ट की धारा 112, 113 और धारा 102 के तहत दी गई पाबंदियों और शुल्कों को हटा दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने कांग्रेस को भेजे आधिकारिक प्रमाणन में कहा है कि यह छूट संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने व्यापार प्रतिनिधि को रूसी ऊर्जा खरीद की निगरानी करने और प्रतिबंधों से बचने के किसी भी सबूत की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है।

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इस फैसले पर अलग-अलग राय सामने आई है। यूक्रेन के समर्थकों और कई डेमोक्रेट्स का मानना है कि इससे रूस पर दबाव बनाने की कांग्रेस की रणनीति कमजोर होगी। वहीं, प्रशासन के समर्थकों का तर्क है कि यह अमेरिकी उपभोक्ताओं को ऊर्जा की ऊंची कीमतों से बचाने के लिए एक व्यावहारिक कदम है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही है और ट्रंप ने बाजार को स्थिर करने के लिए रूस से डीजल की बड़ी मात्रा मंगवाने के सौदे का संकेत दिया है।

भारत इस समय रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। केप्लर के शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत ने प्रतिदिन लगभग 1.82 मिलियन बैरल तेल आयात किया। यह जून में दर्ज 2.6 मिलियन बैरल के शिखर से कम है, लेकिन फिर भी भारत चीन से आगे है, जिसने उसी महीने करीब 1.49 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात किया था।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह राहत कोई स्थायी गारंटी नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और वॉशिंगटन से दोबारा दबाव आने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके मुताबिक, इस अस्थायी राहत को स्थायी व्यापारिक छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह राहत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान आई है, जो 17 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई। रुबियो मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत करेंगे और रिलायंस के जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का दौरा करेंगे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि जामनगर दौरे के दौरान रिलायंस के प्रतिनिधियों के साथ ऊर्जा सहयोग पर चर्चा होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि अब रिफाइनर वर्तमान स्तर पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखेंगे। इस फैसले से नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा आयात रणनीति बनाए रखने का मौका मिला है, हालांकि वॉशिंगटन किसी भी समय इस छूट को वापस ले सकता है।

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