RAF Fairford मामला: ईरान पर आगे कार्रवाई पर विचार कर रहे ट्रंप

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ब्रिटेन के ग्लूसेस्टरशायर स्थित RAF Fairford एयरबेस की सुरक्षा घटना में ईरान की कथित संलिप्तता को देखते हुए वॉशिंगटन ईरान के ख़िलाफ़ और कदम उठाने पर विचार कर रहा है। यह मामला अब सिर्फ़ ब्रिटेन की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिमी देशों के बीच ईरान को लेकर नई तल्खी का कारण बनता दिख रहा है।
मामला 27 सितंबर 2026 का है, जब पुलिस ने सात लोगों को गिरफ़्तार किया था। इनमें छह ब्रिटिश नागरिक थे और एक ब्रिटेन-ईरान का दोहरी नागरिकता वाला व्यक्ति। उन पर आतंकवाद और विस्फोटक से जुड़े अपराधों का शक था। हालांकि सभी को बाद में बिना आरोप तय हुए ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। जांचकर्ताओं को संदिग्धों से जुड़ी गाड़ियों में पेट्रोल मिला था, लेकिन कोई विस्फोटक बरामद नहीं हुआ।
ब्रिटेन ने ईरान और IRGC पर सीधा आरोप लगाया
12 अक्टूबर 2026 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने संसद को बताया कि इस साज़िश का ईरान में तैयार होना "बेहद संभव" है और इसके पीछे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ "लगभग निश्चित" रूप से है। इसके बाद ब्रिटेन सरकार ने तेहरान, IRGC और जासूसी के आरोपी दो व्यक्तियों पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया। इन दो लोगों में IRGC की काउंटर-एस्पियोनेज इकाई के प्रमुख भी शामिल हैं।
विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने ईरानी राजदूत सैयद अली मूसवी को तलब कर इस हमले की कोशिश की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया। ब्रिटेन, अमेरिका और करीब दो दर्जन पश्चिमी सहयोगी देशों ने संयुक्त बयान जारी कर राज्य-समर्थित शत्रुतापूर्ण गतिविधियों की जांच और अभियोजन की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया कि इस घटना से IRGC की उस मंशा का पता चलता है, जिसके तहत वह प्रॉक्सी नेटवर्क के ज़रिये ताकत दिखाना चाहता है।
ब्रिटिश गृह सचिव शबाना महमूद ने इसे व्यापक रुझान से जोड़ा। उनके मुताबिक़ दिसंबर 2025 तक के छह महीनों में ऐसे मामलों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे "घिनौनी साज़िश" और "आधारहीन" अटकल बताया है। तेहरान ने ब्रिटेन से ठोस सबूत पेश करने की चुनौती दी है। ईरान का कहना है कि ये आरोप पश्चिम की सैन्य आक्रामकता से ध्यान हटाने के लिए ईरान-विरोधी अभियान का हिस्सा हैं।
इस बीच अमेरिकी सेना ने सुरक्षा चिंताओं के चलते 4 अक्टूबर 2026 को RAF Fairford से B1 बमवर्षक विमान वापस बुला लिए। ट्रंप ने साफ़ कहा कि इन ख़तरों का सीधा संबंध ईरान से है। अब देखना होगा कि वॉश