ट्यूनीशिया में फिलिस्तीन समर्थक चार कार्यकर्ता छह महीने से हिरासत में, एक की हालत गंभीर.

Praggya Singh sabal10 September 20262 min read24 viewsWorld
ट्यूनीशिया में फिलिस्तीन समर्थक चार कार्यकर्ता छह महीने से हिरासत में, एक की हालत गंभीर.

ट्यूनीशिया में फिलिस्तीन का समर्थन करने वाले चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार हुए छह महीने बीत चुके हैं लेकिन वे अभी भी जेल में बंद हैं। इन चारों लोगों के नाम Wael Naouar, Nabil Channoufi, Ghassan Henchiri और Ghassan Boughdiri हैं। इन्हें इसी साल March 2026 में गिरफ्तार किया गया था। ये सभी लोग Global Sumud Flotilla अभियान का समर्थन कर रहे थे और ट्यूनीशिया की आर्थिक और वित्तीय अदालत के तहत इनकी जांच चल रही है। इन पर मनी लॉन्ड्रिंग और बिना अनुमति के चंदा इकट्ठा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

भूख हड़ताल से बिगड़ी तबीयत

जेल में बंद कार्यकर्ताओं में से एक Wael Naouar ने अपनी गिरफ्तारी के विरोध में August 16 से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। September 10, 2026 तक उनकी हड़ताल को 24 दिन पूरे हो चुके हैं। उनके वकील Bassem Trifi, जो मानवाधिकार संगठन LTDH के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने जानकारी दी है कि उनकी सेहत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। भूख हड़ताल की वजह से उनका वजन करीब 18 किलोग्राम कम हो गया है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है, उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बहुत कम हो गया है और वे सामान्य रूप से चल या बोल भी नहीं पा रहे हैं।

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कोर्ट में पेशी और राजनीतिक विवाद

इन चारों कार्यकर्ताओं को आगामी September 16, 2026 को अदालत में पेश किया जाना है। Global Sumud Flotilla संगठन का कहना है कि इन पर लगाए गए सारे आरोप पूरी तरह से गलत हैं और इन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ, राष्ट्रपति Kais Saied की सरकार का यह कहना है कि देश की न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र है और सरकार इसमें दखल नहीं देती है। इन गिरफ्तारियों में देश की आतंकवाद विरोधी पुलिस यूनिट को लगाया गया था, जिसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार की कड़ी आलोचना की है। लोगों का मानना है कि यह सब राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।

सिविल सोसाइटी की चिंताएं

गिरफ्तार किए गए लोगों के समर्थक, जैसे कि सहायता समिति के Anis Harrathi और राष्ट्रीय रक्षा समिति के Rachid Othmani का कहना है कि इस मामले का मुख्य मकसद फिलिस्तीन के समर्थन की आवाज को दबाना और उसे अपराध की श्रेणी में लाना है। ब्राजील के कार्यकर्ता Thiago Avila और मानवाधिकार संगठन HuMENA समेत कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी इन लोगों की रिहाई की मांग की है। ट्यूनीशिया में एनजीओ और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। मानव अधिकार संगठन Human Rights Watch की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के बाद से एनजीओ से जुड़े कम से कम 47 लोगों पर मुकदमे चलाए गए हैं, जिनमें से 14 लोगों को सजा भी मिल चुकी है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वित्तीय मामलों की जांच का इस्तेमाल करके उन्हें परेशान किया जा रहा है।

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