सऊदी अरब पर ड्रोन हमला, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बनाया गया निशाना, तुर्की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने की कड़ी निंदा

Praggya Singh sabal12 September 20263 min read35 viewsSaudi
सऊदी अरब पर ड्रोन हमला, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बनाया गया निशाना, तुर्की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने की कड़ी निंदा

सऊदी अरब की महत्वपूर्ण तेल और गैस संरचना पर हुए हमलों के बाद दुनिया भर के देशों ने अपनी चिंता जताई है। इराकी क्षेत्र से सऊदी अरब की तरफ ड्रोन दागे जाने की घटना सामने आई है, जिसकी तुर्की सहित कई देशों ने कड़ी निंदा की है। इस गंभीर मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए कई बड़े देशों ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला

11 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के रियाद और मदीना क्षेत्रों से गुजरने वाली प्रमुख East-West pipeline को ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया गया था। इन हमलों की वजह से वहां कुछ लोगों के घायल होने और भौतिक नुकसान की खबर सामने आई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और किसी बड़े खतरे से बचने के लिए तुरंत प्रभाव से इस बुनियादी ढांचे को एहतियातन बंद कर दिया गया था। इस घटना के बाद से ही पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

तुर्की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए 12 सितंबर 2026 को तुर्की के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया। तुर्की ने इस हमले की निंदा की और संघर्ष की स्थिति में सऊदी अरब के संयमित रवैये की खुलकर तारीफ की। इसके साथ ही, इराकी सरकार द्वारा इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के दिए गए भरोसे का भी स्वागत किया गया। इस बारे में अधिक जानकारी Saudi Press Agency (SPA) की आधिकारिक रिपोर्ट से प्राप्त की जा सकती है।

इराक की तरफ से उठाए गए कड़े कदम

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaydi की तरफ से एक औपचारिक अनुरोध किया गया था। इस अनुरोध में कहा गया था कि पूरी जांच के लिए थोड़ा समय दिया जाए, जिसके बाद सऊदी अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से बचने का फैसला किया। प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक जांच परिषद के गठन का आदेश दिया। इसके अलावा, सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए मैसान ऑपरेशंस कमांड के कमांडर को उनके पद से हटा दिया गया और कई सीमा चौकियों को भी बंद कर दिया गया।

क्षेत्रीय संगठनों और देशों की कड़ी प्रतिक्रिया

इस हमले के खिलाफ खाड़ी देशों में विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। Gulf Cooperation Council (GCC) ने इन हमलों को एक खतरनाक और गंभीर escalation बताया है। इसके साथ ही, वर्ल्ड मुस्लिम लीग और बहरीन ने भी इस घटना की तीव्र भर्त्सना की है। इन संगठनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय नियमों का इस तरह से उल्लंघन किया जाना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

इतने सारे दबाव और हमलों के बावजूद, रियाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों, देश की सुरक्षा और महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ऐसी घटनाओं से क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है।

Share:

Comments

Leave a comment