तुर्की संसद ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मक्का रक्षा समझौते को दी मंजूरी
तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को तुर्की संसद ने मंजूरी दे दी है। अब तीनों देश सुरक्षा पर साथ रहेंगे।

अंकारा: तुर्की की संसद ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मिलकर तैयार किए गए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत अब ये तीनों देश रक्षा, सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने के क्षेत्र में एक साथ काम करेंगे।
संसद में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बिल के पहले अनुच्छेद की मंजूरी के बाद इस समझौते की शर्तों पर औपचारिक मतदान हुआ। बता दें कि इस संधि पर 7 अगस्त 2026 को मक्का में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तायिप एर्दोगन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे।
16 अनुच्छेदों वाले इस समझौते का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं की रक्षा के लिए सामूहिक निवारण प्रणाली स्थापित करना है। संधि के दूसरे अनुच्छेद में यह साफ किया गया है कि यदि किसी एक देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में, हस्ताक्षरकर्ता देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग करते हुए तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन प्रतिबद्धताओं की निगरानी के लिए एक 'रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति' बनाई जाएगी, जिसमें तीनों देशों के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ के प्रमुख शामिल होंगे।
इस ढांचे के जरिए रक्षा उद्योगों में सहयोग, आतंकवाद विरोधी अभियानों और संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास को बढ़ावा दिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संसदीय मंजूरी इस संस्थागत सहयोग के लिए कानूनी आधार प्रदान करती है, लेकिन यह सैन्य बलों की तत्काल तैनाती का अधिकार नहीं देती है।
सैन्य तैनाती के लिए जरूरत पड़ने पर अलग से विधायी अनुमति लेनी होगी। तुर्की अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि इस समझौते का मकसद किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखना और संघर्षों को रोकना है।