इजरायल चुनाव में हस्तक्षेप के आरोपों को तुर्की ने सिरे से नकारा
इजरायल ने अपने चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की जांच का दायरा बढ़ाया है, जिसे तुर्की और कतर ने पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।

अंकारा (तुर्की): तुर्की ने इजरायल के हालिया राष्ट्रीय चुनावों में हस्तक्षेप करने के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब इजरायली सुरक्षा एजेंसियां इस हफ्ते हुए चुनावों में संभावित विदेशी दखल की जांच का दायरा बढ़ा रही हैं।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी प्रभाव की इस जांच में अब कतर के साथ-साथ तुर्की पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बताया गया है कि शिन बेट के साथ अब मोसाद भी इस जांच में शामिल है और दोनों देश द्वारा चलाए गए कथित प्रभाव अभियानों की पड़ताल की जा रही है।
इन आरोपों पर तुर्की के कम्युनिकेशंस डायरेक्टोरेट के सेंटर फॉर काउंटरिंग डिसइन्फॉर्मेशन ने कड़ा ऐतराज जताया है। एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म NSosyal पर कहा कि ये आरोप जनमत को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर चलाया गया एक दुष्प्रचार अभियान है। केंद्र ने जनता से अपील की है कि वे इन भ्रामक रिपोर्टों पर भरोसा न करें।
इससे पहले कतर ने भी इजरायली चुनावों में दखल देने की खबरों का खंडन किया था। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने कहा कि कुछ इजरायली राजनेता अपनी विफलताओं को छिपाने और घरेलू राजनीतिक हितों के लिए कतर के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कतर ने चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए किसी भी गतिविधि को फंड नहीं किया है।
अल अंसारी ने इजरायली राजनीति के विभिन्न पक्षों द्वारा कतर को निशाना बनाए जाने पर तंज कसते हुए कहा कि पहले कतर पर बेंजामिन नेतन्याहू और राजनीतिक वामपंथियों को खरीदने के आरोप लगे और अब अरब वोटों के प्रभाव का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इन दावों को सच माना जाए, तो कतर का पूरे इजरायल पर मालिकाना हक होगा।
दूसरी ओर, शिन बेट ने स्पष्ट किया कि वोटर फ्रॉड और विदेशी प्रभाव से जुड़ी जानकारी आंतरिक खुफिया तंत्र से मिली है, न कि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के माध्यम से। एजेंसी ने बताया कि इस खुफिया जानकारी तक पहुंच केवल आंतरिक सुरक्षा कर्मियों और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस नोम सोहलबर्ग तक सीमित थी।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस विवाद को एक भूकंप की तरह बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी संस्थाओं ने अरब पार्टियों के पक्ष में हस्तक्षेप किया है और उन्होंने जायोनी पार्टियों से रा'म और जॉइंट लिस्ट के साथ सहयोग न करने की अपील की है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने कतर के पैसे की संलिप्तता का दावा करते हुए अरब पार्टी प्रमुखों की गिरफ्तारी की मांग की है।
सेंट्रल इलेक्शन कमेटी द्वारा जारी अंतिम परिणामों के अनुसार, 26वीं नेसेट के लिए सीटों का वितरण तय हो गया है, जिसका शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होना है। नतीजों में नेतन्याहू समर्थित गुट को 53 सीटें मिली हैं, जो सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत से कम हैं।