Türkiye और Israel में बढ़ा तनाव, तुर्की विदेश मंत्रालय ने इजरायली बयानों को बताया झूठ और फरेब.

तुर्की और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दोनों देशों की तरफ से तीखे बयानों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 29 अगस्त 2026 को तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक औपचारिक बयान जारी किया जिसमें राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan के खिलाफ इजरायली विदेश मंत्रालय की तरफ से दिए गए बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया। अंकारा ने इजरायल की टिप्पणियों को झूठ और slander करार दिया और इसे इजरायली सरकार के भीतर मौजूद लोगों की कायरतापूर्ण मानसिकता बताया।
नेतन्याहू पर लगे गंभीर आरोप
तुर्की के विदेश मंत्रालय ने सीधे तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का नाम लिया और उनके आपराधिक नेटवर्क पर गाजा में नरसंहार करने तथा क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। तुर्की का कहना है कि इन कार्रवाइयों ने इजरायली लोगों पर ऐतिहासिक कलंक लगा दिया है। इसके अलावा तुर्की ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू और उनके सहयोगियों को मिलने वाली कानूनी और राजनीतिक छूट अब खत्म हो रही है। तुर्की ने इजरायली संस्थानों के प्रचार प्रयासों की तुलना गोएबेल के प्रचार मशीन से की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब नेतन्याहू सरकार के नैरेटिव पर विश्वास नहीं करता है।
राष्ट्रपति एर्दोगन का बयान
उसी दिन यानी 29 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan ने भी अपने अलग भाषण में इजरायल की सरकार को युद्धोन्मादी करार दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल मध्य पूर्व को अस्थिर करने के लिए लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने इस्लामिक दुनिया से अपील की कि वे आपसी सहयोग को बढ़ाएं और वैश्विक समुदाय की आलोचना की जो इस नरसंहार नेटवर्क की नीतियों के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है।
पहले भी हो चुकी है तीखी बयानबाजी
यह पूरा विवाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट का हिस्सा है। इससे पहले 21 अगस्त 2026 को इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने राष्ट्रपति एर्दोगन को यहूदी विरोधी तानाशाह कहा था। इजरायल ने यह भी आरोप लगाया था कि एर्दोगन कुर्दों का नरसंहार कर रहे हैं, हमास के आतंकवादियों को शरण दे रहे हैं, साइप्रस के आधे हिस्से पर कब्जा जमाए हुए हैं और पत्रकारों तथा राजनेताओं को जेल में डाल रहे हैं। उस समय तुर्की के कम्युनिकेशंस निदेशालय ने उन बयानों को खारिज कर दिया था और उन्हें ऐतिहासिक तथ्यों तथा राजनीतिक गंभीरता से रहित बताया था।