तुर्की ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ हुए मक्का डिफेंस पैक्ट को मंजूरी के लिए अपनी संसद में भेजा

Gautam Sahu21 October 20262 min read0 viewsWorld
तुर्की ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ हुए मक्का डिफेंस पैक्ट को मंजूरी के लिए अपनी संसद में भेजा

अंकारा: तुर्की सरकार ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मिलकर तैयार किए गए मक्का डिफेंस पैक्ट को औपचारिक मंजूरी के लिए अपनी संसद में पेश कर दिया है। इस कदम से तीनों देशों के बीच सुरक्षा समझौते को कानूनी रूप मिलेगा।

इस गठबंधन पर 7 अगस्त 2026 को मक्का में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता नाटो के आर्टिकल 5 की तर्ज पर बनाया गया है, जिसमें सामूहिक सुरक्षा का ढांचा तैयार किया गया है।

इस पैक्ट में कुल 16 लेख शामिल हैं, जो सैन्य सहायता, खुफिया जानकारी साझा करने और हथियारों के संयुक्त विकास से जुड़े हैं। समझौते के आर्टिकल 2 के मुताबिक, अगर किसी सदस्य देश पर बाहर से हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा के सिद्धांत का पालन किया जाएगा।

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समझौते के आर्टिकल 1 में सदस्य देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का वादा किया है।

तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने स्पष्ट किया कि यह समझौता ईरान या किसी अन्य विशेष देश के खिलाफ नहीं है। हालांकि, एक तुर्की अधिकारी ने बताया कि हूती खतरों के खिलाफ सऊदी अरब की मदद के लिए सैन्य उपकरणों, खुफिया जानकारी और हथियार प्रणालियों को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि हमलावर सैनिकों की तैनाती को।

इस समझौते में बाहर निकलने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। कोई भी सदस्य देश पहले 10 सालों तक इस पैक्ट से अलग नहीं हो सकता। इस अवधि के बाद बाहर निकलने के लिए तीन महीने पहले लिखित नोटिस देना जरूरी होगा।

गठबंधन ने 5 अक्टूबर 2026 को अपना नेतृत्व कार्यभार संभाला, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को पहला महासचिव नियुक्त किया गया। इस बैठक में तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान, पाकिस्तान के मोहम्मद इसहाक डार और सऊदी अरब के प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद मौजूद थे।

रियाद में हुई एक अलग आपातकालीन बैठक के दौरान सदस्य देशों ने सैन्य क्षमताओं की तेजी से तैनाती के प्रोटोकॉल पर भी सहमति जताई। यह पैक्ट तब पूरी तरह लागू होगा जब मंजूरी का अंतिम दस्तावेज गठबंधन के सचिवालय में जमा कर दिया जाएगा।

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