Strait of Hormuz Attack: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बड़ा हमला, दो फिलीपिंस के नाविकों की हुई मौत, सऊदी कंपनी ने की पुष्टि।

Praggya Singh sabal2 September 20262 min read28 viewsSaudi
Strait of Hormuz Attack: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बड़ा हमला, दो फिलीपिंस के नाविकों की हुई मौत, सऊदी कंपनी ने की पुष्टि।

खाड़ी देशों के पानी में सुरक्षा हालात इन दिनों काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और इसी बीच एक बहुत ही दुखद खबर सामने आई है। सऊदी अरब की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी Bahri ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि उनके एक टैंकर SIDR पर हुए हमले में दो फिलीपिंस के नाविकों की जान चली गई है। यह घटना 31 अगस्त 2026 की शाम को हुई जब यह जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर रहा था। इस हमले के बाद से खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल बढ़ गया है, खासकर उन लोगों के लिए जो समंदर के रास्ते जहाजों पर अपनी सेवाएं देते हैं।

टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला

कंपनी के मुताबिक, जब जहाज ओमान के खासब से लगभग 16.6 नॉटिकल मील उत्तर पूर्व में था, तभी उस पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। मैरीटाइम रिस्क मैनेजमेंट फर्म Marisks की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के दौरान सिर्फ एक नहीं बल्कि दो जहाजों को निशाना बनाया गया था। सिद्र टैंकर के अलावा लाइबेरिया के झंडे वाले दूसरे जहाज Senegal Prosperity को भी कुछ ही मिनटों के अंतराल पर तीन प्रोजेक्टाइल से मारा गया। गनीमत यह रही कि सेनेगल प्रोस्पेरिटी जहाज पर सवार सभी क्रू मेंबर सुरक्षित बचा लिए गए, लेकिन हमले के बाद उस जहाज को खाली करना पड़ा और वह समंदर में एक तरफ झुक गया था।

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यूकेएमटीओ और ईरान का अलग दावा

इस पूरी घटना को लेकर अलग-अलग जगहों से शुरुआती रिपोर्ट सामने आई थीं। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने सबसे पहले 1 सितंबर 2026 को यह बताया था कि ओमान के पास एक टैंकर को निशाना बनाया गया है, हालांकि उस समय शुरुआती जांच में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की बात सामने नहीं आई थी। इसके उलट, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने 2 सितंबर 2026 को यह दावा किया कि इन जहाजों को समुद्री बारूदी सुरंगों यानी सी माइन्स के जरिए बेकार किया गया था। आईआरजीसी ने यह भी आरोप लगाया कि जहाजों पर मौजूद लोगों को जबरन उतारा गया और उन्हें अमेरिका के इशारे पर एक अवैध रास्ते से ले जाया जा रहा था।

क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और हमलों का असर

यह पूरा हमला ऐसे समय में हुआ है जब इस इलाके में सैन्य तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी सेना ने 1 सितंबर 2026 को ईरान समर्थित लगभग 100 ठिकानों पर जवाबी हमले किए थे, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, और क्रूज मिसाइल लॉन्चर शामिल थे। इन अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की तरफ से भी जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और इराक में मौजूद ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई। इन घटनाओं से पहले ही इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने 26 अगस्त 2026 तक इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर 70 हमलों और 19 नाविकों की मौत का डेटा दर्ज किया था। लगातार बढ़ते खतरों को देखते हुए यरुशलम स्थित अमेरिकी दूतावास और बहरीन के आंतरिक मंत्रालय की तरफ से सुरक्षा को लेकर खास चेतावनी जारी कर दी गई है।

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