होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों पर हमला, भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता.

Aanya18 September 20263 min read26 viewsIndia
होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों पर हमला, भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता.

खाड़ी देशों के पास समुद्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और हाल ही में दो ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया जिन पर भारतीय क्रू मेंबर काम कर रहे थे। गुरुवार 18 सितंबर 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास यह बड़ी घटना घटी, जिससे समुद्र में सफर कर रहे भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस हमले के बाद से कुल 153 भारतीय नाविक अभी भी खतरे के साये में फंसे हुए हैं और भारत के कई राज्यों में बैठे उनके परिवार वाले लगातार उनकी सलामती की दुआ मांग रहे हैं।

दो जहाजों पर अलग-अलग हमले

समुद्री सुरक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पनामा के झंडे वाला क्रूड टैंकर MT Basrah Energy होर्मुज जलडमरूमध्य के पास से गुजर रहा था तभी उसके फनल एरिया में एक प्रोजेक्टाइल यानी मिसाइल जैसी चीज से हमला हुआ। गनीमत यह रही कि इस बड़े झटके के बाद भी जहाज को कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा और उस पर सवार सभी 22 क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिनमें 14 भारतीय नागरिक शामिल थे। हमले के बाद इस जहाज को सुरक्षित तरीके से संयुक्त अरब अमीरात के फजेराह बंदरगाह पर रोक लिया गया।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इसी दिन एक दूसरी घटना में ओमान के खासब पोर्ट के पास टोगो के झंडे वाले प्रोडक्ट टैंकर Trend पर एक ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि इस दूसरे मामले में स्थानीय अधिकारियों ने घायलों की संख्या, क्रू मेंबर्स की कुल गिनती या हमलावर कौन था, इस बारे में अभी तक कोई खुलकर आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इस साल फारस की खाड़ी और ओमान के पास भारतीय नाविकों को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले भी एल गया, रास लफ्फन, अल बाहिया, मोम्बाबसा और सेट्टेबेलो जैसे जहाजों पर हमले हो चुके हैं।

फंसे हुए नाविक और परिवारों की चिंता

मौजूदा स्थिति को देखें तो फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में कुल छह भारतीय झंडे वाले जहाज और आठ विदेशी झंडे वाले जहाज मौजूद हैं, जिनका संबंध भारत से है। इन सभी जहाजों पर इस समय कुल 153 भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि हालात की गंभीरता को देखते हुए इनमें से दस जहाजों को वहां से बाहर निकालने यानी इवेकुएशन के लिए चिन्हित कर लिया गया है, लेकिन जमीन पर अभी तक ऐसी कोई भी निकासी प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है।

इस खबर के सामने आने के बाद भारत के कई राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में रह रहे नाविकों के परिवारों की नींद उड़ गई है। परिवार के लोग हर समय अपने अपनों की खैरियत जानने के लिए फोन और खबरों पर नजर बनाए हुए हैं। डीजी शिपिंग की तरफ से पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए कई तरह की एडवाइजरी जारी की जा चुकी है, इसके बावजूद कई कंपनियां और जहाज इस खतरनाक इलाके में लगातार काम कर रहे हैं। कई बार नाविकों को मिलने वाला अतिरिक्त खतरा भत्ता यानी हजार्ड बोनस भी उन्हें इस जोखिम भरे रास्ते पर काम करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे उनकी जान हमेशा खतरे में बनी रहती है।

Share:

Comments

Leave a comment