UAE Retirement News: यूएई में रहने वाले आधे अमीर प्रवासी अब वहीँ बिताना चाहते हैं बुढ़ापा

संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में रहने वाले संपन्न प्रवासियों को लेकर एक बहुत बड़ी बात सामने आई है। हाल ही में आई 'मनी ऑन द मूव' नाम की एक नई वेल्थ सर्वे रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि अब बड़ी संख्या में लोग अपने देश वापस लौटने के बजाय यूएई में ही अपना रिटायरमेंट यानी बुढ़ापा बिताना चाहते हैं। इस सर्वे के मुताबिक, यूएई में रहने वाले करीब 44 प्रतिशत अमीर प्रवासी अब अपने होम कंट्री जैसे भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया वापस जाने की बजाय यूएई में ही रिटायर होने का प्लान बना रहे हैं। यह बदलाव उन लोगों के लिए बहुत खास है जो पहले सिर्फ कुछ साल कमाने के लिए खाड़ी देशों में आते थे।
क्यों बदल रही है प्रवासियों की सोच
इस सर्वे को सेंट जेम्स प्लेस द्वारा इसी हफ्ते जारी किया गया है, जिसमें मई 2026 में 450 हाई-नेट-वर्थ यानी अमीर स्थानीय निवासियों से बातचीत के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि आधे से ज्यादा लोगों ने जितनी योजना बनाई थी, उससे कहीं ज्यादा समय तक यूएई में रहना पसंद किया है। सर्वे में शामिल 78 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे कम से कम अगले आठ साल और विदेश में ही रहना चाहते हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह वहां की मजबूत अर्थव्यवस्था और मिलने वाले आर्थिक लाभ हैं। सर्वे में शामिल 96 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे अपने देश के मुकाबले यूएई में ज्यादा कमाई करते हैं। इसके अलावा 97 प्रतिशत लोग हर महीने ज्यादा बचत कर पा रहे हैं। करीब आधे लोगों का कहना है कि वे अपने देश की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत ज्यादा पैसा कमा रहे हैं और बचा रहे हैं।
वित्तीय स्वतंत्रता और समय की बचत
इस सर्वे के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो यह साफ होता है कि विदेश में रहने से लोगों का वित्तीय जीवन कितना आसान हो गया है। सर्वे के अनुसार, दो तिहाई प्रवासियों का यह मानना है कि उनकी वित्तीय स्वतंत्रता की तारीख यानी जब वे काम करना बंद कर सकते हैं, वह कम से कम पांच साल पहले आ गई है। वहीं, दस में से सात लोगों का यह भी सोचना है कि विदेश में रहने की वजह से उनका रिटायरमेंट का समय कम से कम तीन साल और पहले तय हो गया है। इसके अलावा 9 सितंबर को जारी किए गए एक अन्य आंकड़े में यह बताया गया है कि समय पर वित्तीय सलाह न लेने की वजह से यूएई के एक आम प्रवासी को हर साल लगभग 9,248 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 33,963 भारतीय रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। पूरे कार्यकाल के दौरान यह औसत नुकसान लगभग 56,410 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाता है।
चुनौतियों के बावजूद यूएई पर बना है भरोसा
फरवरी और मार्च 2026 के दौरान ईरान के साथ तनाव और भू-राजनीतिक चुनौतियों की वजह से यूएई को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद अमीर वर्ग का भरोसा यूएई पर पूरी तरह से बना हुआ है। इसी का नतीजा है कि साल 2026 के मध्य तक दुबई की आधिकारिक आबादी में फिर से तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए आंकड़ों के सामने आने के बाद अब लोगों को अपने रिटायरमेंट, गोल्डन वीजा, क्रॉस-बॉर्डर टैक्स, डीआईएफसी या एडीजीएम में वसीयत और भारत के ईपीएफ या एनपीएस जैसे घरेलू संपत्तियों के प्रबंधन पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत है। इस बदलाव से यह भी संकेत मिलता है कि अब परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई, घर और स्वास्थ्य से जुड़े फैसले बहुत ही दूरगामी सोच के साथ ले रहे हैं।