UAE में बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा कानून पास, तलाक के बाद माता-पिता को मानने होंगे ये कड़े नियम.

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में परिवार और बच्चों की भलाई को ध्यान में रखते हुए एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। देश के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय के चेयरमैन Sheikh Mansour bin Zayed Al Nahyan ने तलाक के बाद बच्चों की स्थिति को सुधारने के लिए एक नए चार्टर को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि माता-पिता के अलग होने के बाद भी बच्चों की मानसिक और सामाजिक स्थिति पर कोई बुरा असर ना पड़े और उनका जीवन सामान्य रूप से चलता रहे।
क्या है नया पोस्ट-सेपरेशन चार्टर और इसके नियम
इस नए चार्टर को आधिकारिक तौर पर Resolution No. 43 of 2026 के रूप में 7 September 2026 को जारी किया गया है। यह कानून इस बात पर जोर देता है कि पति-पत्नी का रिश्ता खत्म होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि माता-पिता की जिम्मेदारियां भी खत्म हो गई हैं। अब तलाक के बाद भी पिता और माता दोनों को अपने बच्चों की देखरेख में सक्रिय रूप से शामिल रहना होगा। कानून के मुताबिक बच्चों का हित हमेशा सबसे पहले देखा जाएगा और किसी भी फैसले में बच्चे की खुशी और जरूरत सर्वोपरि होगी।
नए नियमों के अनुसार माता-पिता को बच्चों की पढ़ाई, धार्मिक और नैतिक शिक्षा, सेहत और उनके व्यवहार से जुड़ी हर बात पर मिलकर फैसले लेने होंगे। जो माता-पिता बच्चों के साथ नहीं रह रहे हैं, उन्हें भी स्कूल की गतिविधियों, सेहत की स्थिति और रिपोर्ट कार्ड की जानकारी देना जरूरी किया गया है। इसके अलावा मेडिकल इलाज और यात्रा जैसे बड़े फैसलों पर दोनों की सहमति होना अनिवार्य है।
बच्चों के सामने लड़ाई और कानूनी अधिकारों का गलत इस्तेमाल बंद
इस चार्टर में बहुत सख्ती से यह बात कही गई है कि कोई भी माता-पिता बच्चों के सामने एक-दूसरे की बुराई नहीं करेंगे और ना ही तलाक के कारणों पर बच्चों के सामने चर्चा करेंगे। अक्सर देखने में आता है कि लोग तलाक के बाद बच्चों के भत्ते या मिलने के अधिकारों को हथियार बनाकर एक-दूसरे पर दबाव बनाते हैं या उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं। अब इस नए नियम के तहत ऐसा करना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जो माता-पिता बच्चों के साथ नहीं रहते हैं, उन्हें अपने बच्चों से मिलने और बात करने का पूरा अधिकार रहेगा।
विवाद होने पर कहाँ जाना होगा
अगर इस चार्टर को लागू करने के दौरान माता-पिता के बीच किसी भी तरह का विवाद पैदा होता है, तो उन्हें सबसे पहले आपस में बैठकर आपसी समझौते से मामला सुलझाने की सलाह दी जाती है। अगर आपसी बातचीत से बात नहीं बनती है, तो मामले को अदालत में ले जाने से पहले Family Guidance Centre के पास भेजना जरूरी होगा ताकि सुलह की कोशिश की जा सके। यह पहल Year of Family के तहत परिवार की भलाई को प्राथमिकता देने की देश की प्रतिबद्धता को साफ दिखाती है।