UAE और अज़रबैжан के बीच बड़ा निवेश समझौता, दोनों देशों के रिश्तों में आई और मजबूती.

यूएई के सॉवरेन निवेशक L'IMAD और Azerbaijan Investment Holding (AIH) ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक नए रणनीतिक निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस महत्वपूर्ण समझौते से यूएई और अज़रबैжан के बीच आपसी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और साझा विकास को बढ़ावा मिलेगा। बाकू में आयोजित इस हस्ताक्षर समारोह में अज़रबैжан के राष्ट्रपति Ilham Aliyev और अबू धाबी के उप शासक तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार H.H. Sheikh Tahnoon bin Zayed Al Nahyan विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य अज़रबैжан और व्यापक मध्य एशिया क्षेत्र के भीतर संयुक्त रणनीतिक निवेश को आसान बनाना है। दोनों देश मिलकर कई प्रमुख क्षेत्रों में काम करेंगे, जिसमें मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र, महत्वपूर्ण खनिज और उनसे जुड़ी सप्लाई चेन, शहरी और परिवहन बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं। इस कदम से क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और विकास कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी।
समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख अधिकारी
इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर Jassem Bu Ataba Al Zaabi, जो L'IMAD के प्रबंध निदेशक और ग्रुप सीईओ हैं, और Mikayil Jabbarov, जो अज़रबैжан गणराज्य के अर्थव्यवस्था मंत्री हैं, ने बाकू में हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते आपसी संबंधों को साफ तौर पर दिखाता है और इसका मुख्य उद्देश्य पूंजी का सही इस्तेमाल कर टिकाऊ आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को समर्थन देना है।
Jassem Bu Ataba Al Zaabi ने जानकारी दी कि L'IMAD उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए लंबे समय के लिए पूंजी का निवेश करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अज़रबैжан की रणनीतिक स्थिति और उसकी मजबूत आर्थिक गति इसे आपसी सहयोग को और गहरा करने के लिए एक बेहद आकर्षक बाजार बनाती है।
व्यापार में लगातार हो रही है वृद्धि
यह नया समझौता दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देता है। पिछले कुछ वर्षों में यूएई और अज़रबैжан के बीच व्यापार में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। गैर-तेल व्यापार जो वर्ष 2022 में US$0.98 billion था, वह बढ़कर वर्ष 2025 में US$2.16 billion पर पहुंच गया। इस लगातार बढ़ोतरी से यह साफ होता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इससे दोनों पक्षों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।