यूएई में एक नवंबर 2026 से जानवरों के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगेगी

अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने जानवरों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिप्रोफ्लोक्सासिन एंटीबायोटिक दवा पर देशभर में प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होगा। सरकार ने यह कदम एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता) से लड़ने और इंसानों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए उठाया है।
एमिरेट्स ड्रग एस्टेब्लिशमेंट (EDE) ने 20 अक्टूबर 2026 को इस फैसले की घोषणा की। इस आदेश के मुताबिक, सिप्रोफ्लोक्सासिन युक्त सभी पशु चिकित्सा उत्पादों और कच्चे माल के इस्तेमाल पर रोक होगी। अब कोई भी संस्थान इन उत्पादों का निर्माण, आयात या सप्लाई नहीं कर सकेगा।
दवाओं से जुड़े कारोबारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 1 नवंबर की समय सीमा से पहले बाजार से मौजूदा स्टॉक वापस ले लें। बचे हुए स्टॉक को या तो सरकार द्वारा तय प्रक्रियाओं के जरिए नष्ट करना होगा या फिर उन्हें दूसरे देशों में निर्यात करना होगा।
EDE में मेडिकल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन सेक्टर की एक्टिंग एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. रुकैया अकील अल बस्तकी ने बताया कि यह निर्णय वैज्ञानिक सबूतों और जोखिम आधारित दृष्टिकोण के आधार पर लिया गया है। इस नीति को तैयार करने में यूएई यूनिवर्सिटी द्वारा दिए गए एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के आंकड़ों की मदद ली गई है।
सिप्रोफ्लोक्सासिन को इंसानों में बैक्टीरिया के संक्रमण के इलाज के लिए बेहद जरूरी एंटीमाइक्रोबियल दवा माना जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जानवरों में ऐसी दवाओं के गलत इस्तेमाल से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बड़ा खतरा हो सकता है, क्योंकि इससे दवाएं इंसानों पर कम असरदार हो सकती हैं।
इस प्रतिबंध का असर कुल नौ पशु चिकित्सा उत्पादों पर पड़ेगा, जिनमें आठ आयातित उत्पाद और एक स्थानीय स्तर पर रजिस्टर्ड उत्पाद शामिल है। EDE अब इस बात की निगरानी के लिए एक विस्तृत योजना बना रहा है कि उद्योग इस नियम का पालन कर रहे हैं या नहीं।